स्मृति ईरानीः वो Inside बातें जो आपको जाननी चाहिए

स्मृति ईरानी के मॉडलिंग करियर से राजनीति तक के सफर की ऐसी बहुत सारी इनसाइड बाते हैं जो आपको विस्तार से जाननी चाहिए…


रायपुर. भारतीय राजनीति की प्रखर और आक्रामक वक्ता के रूप में पहचानी जाने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ बीजेपी का नया प्रभारी बनाया गया है. इस घोषणा के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ये प्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है और उनका छत्तीसगढ़ में स्वागत है. लेकिन स्मृति ईरानी के मॉडलिंग करियर से राजनीति तक के सफर की ऐसी बहुत सारी इनसाइड बाते हैं जो आपको विस्तार से जाननी चाहिए…

ये है स्मृति ईरानी का मॉडलिंग सफर 

दिल्ली के एक मिडिल क्लास मल्होत्रा परिवार में जन्मीं स्मृति ईरानी ने अपनी पहचान बनाने के लिए बेहद कड़ा संघर्ष किया. उनकी शुरुआती जिंदगी संघर्षों से भरी थी.

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ और ‘तुलसी’ के किरदार ने बदली किस्मत

साल 2000 में एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस के धारावाहिक क्योंकि सास भी कभी बहू थी ने उनकी किस्मत पूरी तरह बदल दी. इस शो में ‘तुलसी विरानी’ के किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया. शुरुआत में उन्हें शो में रिजेक्ट भी किया गया था और शुरुआती दौर में उन्हें कई ताने सुनने पड़े, लेकिन अपनी मेहनत के दम पर वह टीवी इंडस्ट्री का चमकता सितारा बन गईं. साल 2001 में जुबिन ईरानी के साथ विवाह के बाद वह स्मृति जुबिन ईरानी बन गईं.

हार से सीखकर रचा इतिहास

स्मृति ईरानी ने अपने राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. वर्ष 2003 में उन्होंने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली. मात्र 27 वर्ष की आयु में उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की चांदनी चौक सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनाव लड़ा था.

 इसके बाद उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और साल 2011 में वह पहली बार गुजरात से राज्यसभा सदस्य बनकर संसद पहुंची (2017 में वह दोबारा राज्यसभा गईं).

केंद्रीय मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

नरेंद्र मोदी सरकार के दोनों कार्यकालों में स्मृति ईरानी ने कई अहम मंत्रालयों की कमान संभाली, इसमें उन्होंने मानव संसाधन विकास (शिक्षा) मंत्री, कपड़ा मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (अतिरिक्त प्रभार) और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय संभाला.

पिता ने रखी थी ये शर्त

स्मृति ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मैंने अपने पिता से कर्ज लिया था, पिता ने कहा था कि मैं तुम्हें एक साल का समय देता हूं और अगर तुम मुझे पैसे नहीं दे सकती, तो मैं जिससे भी कहूं, उससे शादी कर लेना.

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