तीन शहर, तीन मौतें और एक जैसी कहानी… दहेज के आरोपों के बीच खत्म हो गईं ट्विशा, दीपिका और पलक की जिंदगी
दहेज के कारण या फिर कुछ वजह से हुई मौत
Dowry death cases India: देश के अलग-अलग शहरों से सामने आए तीन मामलों ने एक बार फिर दहेज और शादी के बाद होने वाले मानसिक उत्पीड़न पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की ट्विशा शर्मा, दीपिका नागर और पलक रंजन की मौत भले अलग-अलग जगह हुई हो, लेकिन परिवारों के आरोप लगभग एक जैसे हैं. परिवार का आरोप है कि दहेज की मांग, मानसिक दबाव के कारण उनकी बेटियों की मौत हुई है.
ट्विशा की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
भोपाल में रहने वाली ट्विशा शर्मा की 12 मई को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. शुरुआत में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और हत्या के आरोप लगाए हैं. मामले ने इतना तूल पकड़ा कि दूसरी बार पोस्टमार्टम कराया गया और अब सुप्रीम कोर्ट भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. पति समेत कई लोगों पर केस दर्ज हुआ है.
ट्विशा के परिवार का कहना है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद से उस पर दबाव बढ़ने लगा था. वहीं ससुराल पक्ष लगातार आरोपों से इनकार करता रहा है. केस में CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और कॉल रिकॉर्डिंग जैसे कई पहलुओं की जांच हो रही है.
तीसरी मंजिल से गिरने के पीछे क्या था सच?
ग्रेटर नोएडा की दीपिका नागर की शादी को डेढ़ साल भी नहीं हुआ था. परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही कार, नकदी और सोने की मांग की जा रही थी. दीपिका की मौत तीसरी मंजिल से गिरने के बाद हुई, लेकिन परिजनों का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर के अंदर गंभीर चोटें मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया. परिवार का कहना है कि दीपिका कई बार घर आने की बात कहती थी, लेकिन हर बार उसे सब ठीक हो जाएगा कहकर समझाया गया.
शादी के एक साल बाद खत्म हो गई जिंदगी
ग्वालियर की पलक रंजन की मौत भी इसी महीने हुई. परिवार ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से लगातार दहेज को लेकर ताने दिए जाते थे. बताया जा रहा है कि मौत से पहले उसने अपने करीबियों से मानसिक तनाव की बात भी साझा की थी.
पहले भी देश को झकझोर चुके हैं ऐसे मामले
देशभर में में दहेज को लेकर विवाद और मौत के मामले नए नहीं हैं. साल 2003 का चर्चित निशा शर्मा दहेज केस पूरे देश में चर्चा का विषय बना था. उस मामले में शादी के मंडप से दहेज मांगने का आरोप लगा और दूल्हे पक्ष की गिरफ्तारी हुई थी. हालांकि बाद में अदालत ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया था.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर साल हजारों महिलाएं दहेज से जुड़े मामलों में जान गंवाती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि कानून होने के बावजूद सामाजिक दबाव और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण कई महिलाएं समय रहते आवाज नहीं उठा पातीं.
ये भी पढ़ें:ट्विशा शर्मा की मौत बनी रहस्य, वो 7 सवाल जिनके जवाब का अब भी सभी को इंतजार