14 साल में ₹1 करोड़ टैक्स दिया!नौकरी गई तो नहीं मिला कोई सहारा, इंजीनियर की पोस्ट ने छेड़ी नई बहस

India Income Tax:: 14 साल में करीब ₹1 करोड़ टैक्स भरने वाले एक आईटी प्रोफेशनल ने नौकरी जाने के बाद किसी तरह की सरकारी मदद नहीं मिलने का दावा किया उनकी सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होने के बाद टैक्स, बेरोजगारी और सामाजिक सुरक्षा को लेकर नई बहस छिड़ गई।
परेशान युवक (फाइल फोटो)

परेशान युवक (फाइल फोटो)

India Income Tax: सोशल मीडि‍या पर एक पोस्‍ट इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है. इस पोस्‍ट में एक आईटी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी ने दावा किया कि उसने 14 साल की नौकरी के दौरान उन्होंने करीब 1 करोड़ रुपये आयकर के रूप में सरकार को दिया. लेकिन, जब कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया तो किसी तरह की सरकारी मदद या सुरक्षा नहीं मिली.

आईटी प्रोफेशनल मोहम्मद नोवसाथ ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में ईमानदारी से टैक्स चुकाया है. लेकिन, नौकरी जाने के बाद उन्हें किसी तरह की आर्थिक सहायता या सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिला. उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग सालों तक टैक्स भरते हैं, उनके लिए कठिन समय में कोई व्यवस्था क्यों नहीं है.

हजारों लोगों तक पहुंची पोस्‍ट

मोहम्मद नोवसाथ की पोस्ट कुछ ही समय में हजारों लोगों तक पहुंच गई. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी बात का समर्थन किया और कहा कि भारत में नौकरी छूटने के बाद कर्मचारियों के लिए कोई मजबूत बेरोजगारी सहायता प्रणाली नहीं है. उनका मानना है कि सरकार को ऐसे लोगों के लिए कुछ आर्थिक सुरक्षा या अस्थायी मदद की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि अचानक नौकरी जाने पर परिवार पर बड़ा संकट न आए.

पूरे मामले पर लोगों की अलग-अलग राय

इस मामले पर कई लोगों की राय इससे अलग भी रही. उनका कहना था कि भारत की आर्थिक स्थिति विकसित देशों जैसी नहीं है, इसलिए यहां यूरोप या अमेरिका की तरह बेरोजगारी भत्ता लागू करना आसान नहीं होगा. कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि कम से कम नौकरी छूटने पर मिलने वाले सेवरेंस पैकेज (मुआवजा) पर टैक्स नियमों को आसान बनाया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.

किस बात की चर्चा कर रहे लोग

इस पूरे मामले ने एक बार फिर टैक्स व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और नौकरी छूटने के बाद मिलने वाली सरकारी सहायता पर चर्चा शुरू कर दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते रोजगार बाजार और लगातार हो रही छंटनी को देखते हुए भविष्य में इस तरह की नीतियों पर गंभीर विचार किए जाने की जरूरत पड़ सकती है. वहीं, सोशल मीडिया पर लोग लगातार इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं.

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