TMC के बागी गुट में सब ठीक ? तीन मुस्लिम सांसदों की दूरी से उठे बड़े सवाल
बागियों के बीच से होगी बगावत?
TMC Rebel Camp NCPI: पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले दिनों जो भी हुआ हर किसी ने देखा. किस तरह चुनाव नतीजों के ममता बनर्जी की पार्टी पत्तों की तरह बिखर गई. कैसे उनके सबसे ज्यादा करीबी नेताओं ने उनका साथ छोड़कर अलग गुट बना लिया. कुल मिलाकर पहले और आज की ममता की पार्टी में जमीन-आसमान का अंतर है. ज्यादातर नेता बगावत कर चुके हैं. बागी नेताओं ने TMC से अलग होकर बने एनसीपीआई (NCPI) का दामन थामा था. हालांकि अब इसमें भी फूट पड़ती नजर आ रही है. दावा किया जा रहा है कि यूसूफ पठान समेत तीन मुस्लिम सांसदों ने बीजेपी और एनडीए का साथ देने साफ इनकार कर दिया है.
टीएमसी के बागियों की हाल ही में एक बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक से कई नेताओं ने दूरी बनाई है. जिसके बाद ऐसा दावा किया जा रहा है कि बागी गुट में सब कुछ ठीक नहीं है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जंगीपुर से सांसद खालिलुर रहमान, मुर्शिदाबाद से अबू ताहेर खान और बहरामपुर से यूसुफ पठान इस बैठक में शामिल नहीं हुए.
इससे पहले भी ये तीनों सांसद एनडीए की पहली ‘मंगल मिलन’ बैठक में गैरहाजिर रहे थे. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या एनसीपीआई के सभी सांसद एनडीए के साथ आगे बढ़ने को लेकर एकमत नहीं हैं.
इलाकों का दबाव या वोटर की चिंता?
राजनीतिक गलियारों में इन सांसदों को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन सांसदों पर अपने इलाकों के वोटरों का दबाव है. दावा किया जा रहा है कि वोटर्स का एक वर्ग एनडीए के साथ जाने पर खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहा है. यही वजह है कि नेताओं ने दूरी बनाए रखने का फैसला किया है. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
ताहेर खान ने इस तरह के दावे पर क्या कहा?
वहीं, अबू ताहेर खान ने स्पष्ट किया है कि बैठक में शामिल न होने का अर्थ यह नहीं है कि वे किसी नए राजनीतिक फैसले की ओर बढ़ रहे हैं. उनका कहना है कि वे एनडीए का हिस्सा नहीं हैं. उनकी अनुपस्थिति को किसी नए गठबंधन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
आगे क्या रुख अपनाएंगे मुस्लिम नेता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोकसभा में एनसीपीआई को अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता मिलने का मामला भी लंबित है. ऐसे में तीन सांसदों की लगातार गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह नया राजनीतिक गुट एकजुट रहता है. या इसके भीतर उभर रहे मतभेद खुलकर सामने आते हैं.
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