‘छोटे-मोटे आरोप लगाकर परिवार को कोर्ट में नहीं घसीटा जा सकता…’, दहेज उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट(File Photo)
Supreme Court Dowry Decision: देश में इस समय दहेज प्रताड़ना के कई मामले ऐसे सामने आए हैं, जिनकी वजह से हर कोई परेशान हैं. इनमें कई मामले बड़े परिवार से भी हैं. हालांकि कई मामले ऐसे भी होते हैं जो पूरी तरह से झूठे साबित होते हैं. यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज प्रताड़ना या उत्पीड़न के कई तरह के आरोप लगाए जाते हैं. लेकिन छोटे-मोटे आरोप लगाकर पूरे परिवार को किसी भी हालत में कोर्ट में नहीं घसीटा जा सकता है. अगर आरोप लगाए गए हैं तो साफ तौर पर ठोस सबूत पेश करना हर मामले में जरूरी होगा.
समझें पहले पूरा मामला क्या है.
मध्य प्रदेश के गुना जिले का एक मामला है, जिसमें महिला की तरफ से अपने ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा, क्रूरता और दहेज मांगने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद पुलिस ने महिला की शिकायत पर मामला दर्ज भी कर लिया था. महिला ने पूरे परिवार पर आरोप लगाया था कि शादी के समय जो भी डिमांड की गई थी उसको पूरा किया गया था. इसके बाद भी उसे ससुराल में प्रताड़ना मिली. इनमें मानसिक उत्पीड़न, कैमरों से निगरानी, आने-जाने पर प्रतिबंध और लाइसेंस प्राप्त गन से धमकियों के आरोप शामिल हैं.
इस मामले में ससुराल पक्ष में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था और उनके खिलाफ चल रहे मामले को रद्द करने की मांग की थी. हालांकि हाईकोर्ट ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था. कोर्ट ने कहा के रिश्तेदारों के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप सही हैं.
ससुराल पक्ष ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया और ससुराल वालों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को पूरी तरह खत्म कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि इसमें कानून का दुरुपयोग किया गया है.
फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि जब परिवार यानी कि पति और पत्नी के बीच संबंध बिगड़ते हैं. तो इसका सीधा असर पूरे परिवार पर पड़ता है. गुस्से के कारण पत्नी पति के पूरे परिवार का नाम मामले में दर्ज करा देती हैं. इसके कारण इस तरह के मामले सामने आते हैं. कोर्ट ने निचली अदालतों को भी सलाह दी है. निचली अदालतें ऐसे मामलों में पूरी सावधानी बरतें और बिना जांचे-परखे रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति न दें.
कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में पूरे परिवार को घसीटना सही नहीं है. बल्कि आपसी सामंजस्य बिठाना बहुत जरूरी है. अगर ससुराल पक्ष के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है तो उनको केस में नहीं घसीटना चाहिए.
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