‘शादी हिंसा का लाइसेंस नहीं…’,पत्नी से क्रूरता करने वाले पति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जमानत खार‍िज

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक मामले में आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा.
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सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court News: देश में आए हर रोज घरेलू ह‍िंसा के सैकड़ों मामले सामने आते हैं. उन्हीं को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी के साथ बेहद क्रूर व्यवहार करने वाले पति को राहत देने से इनकार करते हुए साफ कहा कि शादी किसी महिला पर हिंसा करने का लाइसेंस नहीं हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्नी की इच्छा और सम्मान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. उसके साथ “जानवरों जैसा व्यवहार” करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती है. मतलब साफ है कि अब आने वाले समय में ऐसे मामलों में जमानत नहीं दी जाएगी.  

पूरा मामला पति से जुड़ा था जिस पर अपनी पत्नी के साथ लगातार मारपीट और हिंसक व्यवहार करने के आरोप हैं. सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने अदालत से जमानत की मांग करते हुए कहा कि घटना गुस्से और पारिवारिक विवाद के दौरान हुई थी. लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया.

समाज में जाएगा गलत संदेश

कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि किसी भी पति को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह पत्नी को अपनी संपत्ति समझे या उसकी मर्जी के खिलाफ हिंसा करे.  यह भी कहा कि घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों को सामान्य पारिवारिक झगड़े की तरह नहीं देखा जा सकता है. कोर्ट अगर इस तरह के मामलों में जमानत देगा तो समाज पर इसका गलत असर पड़ेगा.

शादी में सहमति और सम्मान होना चाहिए- SC

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि विवाह का रिश्ता सम्मान, सहमति और बराबरी पर आधारित होना चाहिए. किसी महिला का विरोध करना, अलग रहने की इच्छा जताना या हिंसा का विरोध करना पति के लिए हमला करने का कारण नहीं बन सकता है. इन्हीं तथ्यों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया और निचली अदालत को मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया.

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