अब शादी भी ‘ट्रायल पीरियड’ पर! पसंद न आए तो 5 साल में खत्म हो जाता है रिश्ता, जानिए क्या है ‘स्टार्टर मैरिज’
स्टार्टर मैरिज क्या होता है
Marriage Now On Trial Period: भारत में शादी को जीवनभर का रिश्ता माना जाता है, जिसे बहुत पवित्र और मजबूत बंधन समझा जाता है. वहीं कई पश्चिमी देशों में शादी को लेकर लोगों की सोच अलग होती है. वहां समय के साथ रिश्तों और विवाह को लेकर नए-नए ट्रेंड सामने आते रहते हैं. इन दिनों ऐसा ही एक नया ट्रेंड ‘स्टार्टर मैरिज’ काफी चर्चा में है. आइए जानते हैं कि इसका मतलब क्या है.
क्या होती है स्टार्टर मैरिज?
‘स्टार्टर मैरिज’ का मतलब ऐसी पहली शादी से है, जो आमतौर पर 5 साल या उससे कम समय तक चलती है. इस दौरान पति-पत्नी के बच्चे नहीं होते और अगर रिश्ता नहीं चल पाता तो दोनों आपसी सहमति से अलग हो जाते हैं. लोग इस शादी को एक सीख या अनुभव की तरह देखते हैं, ताकि भविष्य में बेहतर जीवनसाथी और मजबूत रिश्ता बना सकें. भारत में इस तरह की सोच अभी बहुत कम देखने को मिलती है, क्योंकि यहां शादी को लंबे समय तक निभाने की परंपरा अधिक मजबूत है.
‘स्टार्टर मैरिज’ शब्द कहां से आया?
जानकारी के अनुसार, ‘स्टार्टर मैरिज’ शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल साल 1994 में न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में किया गया था. इस शब्द को पत्रकार डेबोरा शूपैक ने अपने लेख के जरिए लोगों के सामने रखा था. हालांकि, उस समय यह ज्यादा चर्चा में नहीं था, लेकिन हाल के वर्षों में यह शब्द सोशल मीडिया और रिश्तों से जुड़ी चर्चाओं में काफी लोकप्रिय हो गया है.
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इस तरह की शादी का उद्देश्य क्या है?
आज की युवा पीढ़ी का एक वर्ग ‘स्टार्टर मैरिज’ को जीवन का एक अनुभव मानता है. उनका मानना है कि शादी के बाद कुछ साल साथ रहने से यह समझने का मौका मिलता है कि दोनों एक-दूसरे के साथ लंबे समय तक खुश रह सकते हैं या नहीं. अगर रिश्ता मजबूत रहता है तो शादी आगे बढ़ती है, लेकिन अगर लगातार मतभेद और समस्याएं बनी रहती हैं तो दोनों बिना ज्यादा विवाद के अलग होकर अपनी-अपनी नई जिंदगी शुरू कर लेते हैं.