MP में 51 महीनों में 15 हजार e-FIR, थाने में दर्ज हो सकीं केवल 1500, PHQ ने बढ़ाई मॉनिटरिंग
MP पुलिस मुख्यालय
MP News: ई-एफआईआर (e-FIR) प्रणाली में सामने आई यह जानकारी बताती है कि डिजिटल रूप से दर्ज की गई. 15,000 शिकायतों में से केवल 1,500 मामले (लगभग 10%) ही पुलिस थानों तक भौतिक रूप से जांच के लिए पहुंच पाए हैं. यह दर्शाता है कि ऑनलाइन दर्ज मामलों की जांच और उन पर कार्रवाई की गति बहुत धीमी है, जिससे 90% से अधिक ई-एफआईआर लंबित या अनसुलझे मामलों की श्रेणी में हैं.
क्या है मुख्य वजह?
ई-एफआईआर व्यवस्था मध्य प्रदेश में 51 महीनों में अढ़ाई कोस भी नहीं चल सकी. अक्टूबर 2021 से अब तक ऑनलाइन दर्ज हुई करीब 15 हजार ई-एफआईआर में से लगभग 1,500 मामले ही पुलिस थानों तक पहुंच पाए. यानी हर दस शिकायतों में नौ शिकायतें अब बंद हो चुकी है. चार साल से ज्यादा समय में सामने आई यह तस्वीर सिर्फ तकनीकी खामी नहीं, बल्कि इसके बाद भी प्रक्रिया का जटिल होना और जवाबदेही की कमी का कारण माना जा रहा है.
15 लाख तक के चोरी के मामले होते थे दर्ज
ई-एफआईआर इस सोच के साथ शुरू की गई थी कि नागरिक बिना थाने जाएं, तत्काल अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकें. खासकर, ऑनलाइन फ्रॉड और वाहन चोरी के मामलों में ताकि पुलिस समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कर सके. शुरूआती दौर में इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली. करीब सवा चार पहले यह सुविधा विशेष रूप से वाहन चोरी (15 लाख रुपये तक) और सामान्य चोरी (1 लाख रुपये तक) जैसे मामलों के लिए शुरू की गई थी.
कब शुरू हुई थी e-FIR सुविधा?
सूत्रों की मानी जाए तो अधिकांश ऑनलाइन शिकायतें नियमित एफआईआर बनने से पहले ही लैप्स हो रही हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण तीन दिन की अनिवार्य समय-सीमा को माना जा रहा है. नियमों के मुताबिक, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतकर्ता को तीन दिन के भीतर संबंधित पुलिस थाने में उपस्थित होना आवश्यक होता है.
प्रदेश में 21 अक्टूबर 2021 को ई-एफआईआर दर्ज होना शुरू हुई थी. इसके बाद इसका स्वरूप 25 दिसंबर 2025 को बड़ा कर दिया गया. अब पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में शुरू की गई ई-जीरो एफआईआर को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू की है.
शिकायत के बाद भी थाने नहीं पहुंच रहे फरियादी
इस पर अब पीएचक्यू लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है और जिलों से इस संबंध में लगातार अपडेट लिया जाता रहेगा. हालांकि इसके बाद भी शिकायतकर्ता को तीस दिन का मौका और दिया जाता है. इसके बाद भी ई-एफआईआर करने वाले अधिकांश लोग थाने तक नहीं पहुंच रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि बहुत कम शिकायतकर्ता तय समय में थानों तक पहुंच पाए.