भोपाल में 5 साल में 8.56 करोड़ खर्च, फिर भी रोजाना 81 डॉग बाइट के मामले, शहर में एक भी शेल्टर नहीं
सांकेतिक तस्वीर (स्त्रोत - ANI)
MP News: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार (19 मई) को सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. कहा कि स्कूल, हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैण्ड जैसे सार्वजनिक स्थानों से खतरनाक कुत्तों को हटाया जाना चाहिए. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इसका पालन आसान नहीं लग रहा है. इसकी सबसे वजह ये है कि यदि कुत्तों को हटाया जाता है तो इन्हें कहां रखा जाएगा क्योंकि शहर में एक भी शेल्टर नहीं है.
पिछले 5 सालों में 8.56 करोड़ खर्च
भोपाल नगर निगम ने पिछले पांच सालों में 8.56 करोड़ रुपये कुत्तों की नसबंदी और उनकी वैक्सीनेशन पर खर्च किए गए. इसके बावजूद हर रोज डॉग बाइट के 81 मामले आ रहे हैं. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से रोजाना 15 शिकायतें नगर निगम पहुंच रही है. कुत्ते सबसे ज्यादा बुजुर्गों और बच्चों को निशाना बना रहे हैं. इसके साथ-साथ रात के समय बाइक सवारों और पैदल चल रहे लोगों को काट रहे हैं.
शहर में एक भी स्थायी शेल्टर नहीं
दरअसल, भोपाल नगर निगम के पास शहर में आदमपुर छावनी, अरवलिया और कजलीखेड़ा में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर हैं. जहां प्रतिदिन 20-25 कुत्तों की नसबंदी की जा रही है. तीनों सेंटर्स की कुल क्षमता 600 डॉग्स की है लेकिन यहां केवल टीकाकरण होता है. स्थायी शेल्टर नहीं है. एक अनुमान के मुताबिक शहर में 1 लाख 20 हजार कुत्ते हैं.
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810 जगहों को ‘नो डॉग जोन’ बनाया गया
सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश के बाद नगर निगम ने शहर के स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, खेल परिसर और दूसरे सार्वजनिक स्थानों को मिलाकर 810 जगहों पर ‘नो डॉग जोन’ बनाए थे. वहीं, अशोका गार्डन, अयोध्या बाईपास, पिपलानी, लालघाटी, ISBT, न्यू मार्केट को संवेदनशील स्थानों में शामिल किया गया.