MP Cabinet Decision: कपास पर मंडी शुल्क आधा, अन्य कृषि उपज पर शुल्क बढ़ा, मोहन कैबिनेट में इन प्रस्तावों पर लगी मुहर

MP Cabinet Decision: कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि कपास पर लगने वाला मंडी शुल्क जो अभी 1 प्रतिशत (प्रति 100 रुपये पर 1 रुपये) है, उसे घटाकर 0.5 प्रतिशत किया जाएगा. सरकार का मानना है कि महाराष्ट्र में पहले से ही कपास पर आधा प्रतिशत मंडी शुल्क लागू है, जिसके कारण सीमावर्ती जिलों बुरहानपुर, खंडवा और निमाड़ के किसान तथा उद्योग प्रभावित हो रहे थे.
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मोहन कैबिनेट मीटिंग

MP Cabinet Decision: मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में किसान कल्याण और कृषि क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. सरकार ने विभिन्न योजनाओं के संचालन, परामर्श सेवाओं और अन्य सेवाओं की निरंतरता के लिए 235 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. वहीं कपास उत्पादक किसानों और कृषि उद्योगों को राहत देने के उद्देश्य से मंडी शुल्क में भी बड़ा बदलाव किया गया है.

कपास पर मंडी शुल्क 0.5 प्रतिशत हुआ

कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि कपास पर लगने वाला मंडी शुल्क जो अभी 1 प्रतिशत (प्रति 100 रुपये पर 1 रुपये) है, उसे घटाकर 0.5 प्रतिशत किया जाएगा. सरकार का मानना है कि महाराष्ट्र में पहले से ही कपास पर आधा प्रतिशत मंडी शुल्क लागू है, जिसके कारण सीमावर्ती जिलों बुरहानपुर, खंडवा और निमाड़ के किसान तथा उद्योग प्रभावित हो रहे थे.

कम शुल्क के कारण कई किसान अपना उत्पाद महाराष्ट्र की मंडियों में बेचने के लिए मजबूर होते थे. अब मध्य प्रदेश में भी शुल्क कम होने से कपास की प्रोसेसिंग राज्य के भीतर ही होगी, जिससे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा.

अन्य कृषि उपज शुल्क बढ़ा

कपास को छोड़कर अन्य कृषि उपज पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत करने का निर्णय भी लिया गया है. सरकार के अनुसार इससे मंडी बोर्ड को करीब 800 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय प्राप्त होने की संभावना है.

इस अतिरिक्त राशि का उपयोग किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर किया जाएगा. सरकार ने बताया कि बढ़े हुए शुल्क से प्राप्त धनराशि का उपयोग निम्न कार्यों में होगा

  • ग्रामीण एवं कृषि सड़कों के निर्माण
  • मंडी अधोसंरचना विकास
  • कृषि संवर्धन कार्यक्रम
  • कृषक जीवन कल्याण योजनाएं
  • कृषि अनुसंधान
  • किसानों के लिए प्रचार-प्रसार और जागरूकता कार्यक्रम
  • उर्वरक उपलब्धता पर विशेष फोकस

बैठक में आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो.

उर्वरक वितरण अधिक डिजिटल बनाने पर जोर

सरकार ने प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया है. साथ ही उर्वरक वितरण प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके.

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नीति आयोग की बैठक में विकसित एमपी का रोडमैप

सरकार ने बताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप विकसित मध्यप्रदेश की रूपरेखा तैयार की जा रही है. इसी संबंध में नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री प्रदेश की विकास रणनीति और गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण तथा कृषि विकास से जुड़े कार्यक्रमों को प्रस्तुत करेंगे.

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