भोपाल कांग्रेस कार्यकारिणी घोषित होने के बाद नेताओं में नाराजगी, पीसी शर्मा बोले- जो प्रदर्शन करके जेल जाते हैं, उन्हें शामिल नहीं किया

पीसी शर्मा ने कहा, 'जो जिला कार्यकारिणी बनी है. उसको लेकर मेरे पास कई लोगों के फोन आए हैं. लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. जो लोग रोज जेल जाते हैं, प्रदर्शन करते हैं, जो संघर्ष करते हैं, उनकी अनदेखी की गई है.'
Congress leader PC Sharma.

कांग्रेस नेता पीसी शर्मा.

MP News: भोपाल कांग्रेस कार्यकारिणी की घोषणा की जा चुकी है. गुरुवार को पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने 52 पदाधिकारियों वाला कार्यकारिणी की घोषणा की. लेकिन कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है. नाराज कार्यकर्ताओं के समर्थन में पीसी शर्मा भी उतर आए हैं. उन्होंने कार्यकारिणी को लेकर नाराजगी जताई है. पीसी शर्मा ने कहा है कि जो नेता, कार्यकर्ता पार्टी के लिए प्रदर्शन करते हैं और जेल जाते हैं, उन्हें कार्यकारिणी में जगह नहीं दी गई है.

‘सक्षम और संघर्षशील लोगों को छोड़ दिया गया’

कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने शुक्रवार को मीडिया से बात की. इस दौरान उन्होंने भोपाल कार्यकाारिणी को लेकर असंतोष जताया है. पीसी शर्मा ने कहा, ‘जो जिला कार्यकारिणी बनी है. उसको लेकर मेरे पास कई लोगों के फोन आए हैं. लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. जो लोग रोज जेल जाते हैं, प्रदर्शन करते हैं, जो संघर्ष करते हैं, उनकी अनदेखी की गई है. कांग्रेस का कार्यकर्ता मायूस है. जो सक्षम लोग थे, संघर्षशील थे. उनको छोड़ दिया गया है. उनको एडजस्ट करना चाहिए नहीं तो मैं समझता हूं कि ये ब्लैक स्पॉट रहेगा.’

‘निर्मला सप्रे के मामले में गेंद विधानसभा अध्यक्ष के पाले में है’

वहीं निर्मला सप्रे की सदस्यता के मामले पर पूर्व मंत्री ने कहा, ‘ना तो चुनाव आयोग सुन रहा है. ना सरकार सुन रही है, ना कोर्ट सुन रहा. निर्मला सप्रे के बारे में कहना क्या है. सप्रे बीजेपी की मीटिंग में जा रही हैं. सबूत की जरूरत क्या है. विधानसभा अध्यक्ष के पास मामला है. बुद्धिमान अध्यक्ष हैं, उनको दोबारा चुनाव करवा लेना चाहिए. अगर ऐसा करेंगे तो लगेगा कि देश में कुछ ना कुछ कानून बचा हुआ है. गेंद विधानसभा अध्यक्ष के पाले में है. उनको चुनाव करवा लेना चाहिए.

पीसी शर्मा ने उज्जैन में मोहर्रम पर कार में ब्लास्ट करने वाली घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘कानून व्यवस्था ध्वस्त है. कहीं अशोकनगर में लड़के-लड़की की मौत हो रही है. पूरे एमपी की यही व्यवस्था है. उज्जैन में ये स्थिति क्यों बनी. कानून व्यवस्था बिगड़ने की नौबत क्यों आई. ये टेंशन ना बढ़े इसके लिए पहले से कदम उठाए जाते हैं. पुलिस व्यवस्था सिर्फ नाम की है. सड़कों पर पुलिस हेलमेट चेक कर रही है. चालान कर रही है, या फिर दूसरे तरीके से पैसे ले रही है.’

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