MP News: अपनी ही सरकार पर BJP विधायक का प्रहार, विधानसभा में जवाबों की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
मध्य प्रदेश विधानसभा(File Photo)
MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा के भीतर इस बार सियासी हलचल तब तेज हो गई, जब सत्तारूढ़ दल के एक विधायक ने ही सरकार के जवाबों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए. सवालों के बिंदु हटाने, अधूरी जानकारी देने और विभागीय जवाबों में विरोधाभास के आरोपों ने सत्ता पक्ष के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी है. बताया जा रहा है कि विधायक ने प्रमुख सचिव विधानसभा को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है कि उनके द्वारा लगाए गए प्रश्नों के मूल बिंदुओं में बदलाव किया गया. उनका आरोप है कि महत्वपूर्ण तथ्यों को हटाकर सीमित दायरे में जवाब मंगाए गए, जिससे विषय का मूल उद्देश्य प्रभावित हुआ.
व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है उद्देश्य
विधायक का कहना है कि यदि जनहित से जुड़े प्रश्नों के साथ इस तरह की ‘संपादन प्रक्रिया’ अपनाई जाएगी, तो सदन की गरिमा और जवाबदेही दोनों प्रभावित होंगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है. मामले का दूसरा पहलू विभागीय जवाबों से जुड़ा है. विधायक ने दावा किया है कि एक ही विषय पर अलग-अलग समय पर जारी पत्रों और सदन में दिए गए उत्तरों में विरोधाभास दिखाई देता है. कुछ मामलों में आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए, जबकि कुछ बिंदुओं पर औपचारिक जवाब देकर विषय को टालने का प्रयास किया गया. सत्ता पक्ष के विधायक द्वारा उठाए गए इन सवालों को विपक्ष भी मुद्दा बनाने की तैयारी में है. विपक्ष का कहना है कि यदि सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि ही जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं तो स्थिति गंभीर है.
‘पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी’
सूत्रों के मुताबिक, प्रश्नों को संक्षिप्त करने और नियमों के अनुरूप संपादित करने की प्रक्रिया लंबे समय से चली आ रही है. हालांकि, अब यह प्रक्रिया विवाद के केंद्र में है. भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा है. पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि पारदर्शिता और तथ्यात्मक जवाब सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, चाहें सवाल सत्ता पक्ष से आए या विपक्ष से आए. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रमुख सचिव स्तर पर क्या जांच होती है और क्या भविष्य में प्रश्नों की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा. विधानसभा के भीतर उठी यह आवाज सरकार के लिए आत्ममंथन का संकेत मानी जा रही है.
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