‘सुधर जाओ, नहीं तो ठीक नहीं होगा…’, दमोह मंडी में अव्यवस्था पर भड़के कलेक्टर, किसानों की सुनी समस्या
दमोह कलेक्टर ने अनाज मंडी का किया औचक निरीक्षण
MP News: जब-जब किसानों के हक और उनको मुहैया कराई जाने वाली सुविधाओं की बात आती है. तब-तब प्रशासन कटघरे में खड़ा दिखाई देता है, मानो सिस्टम ही किसानों का मुजरिम बना बैठा है. मध्य प्रदेश के दो राज्यमंत्री पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन पटेल और संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेद्र सिंह लोधी वाले गृह जिले यानी दमोह से ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सोमवार को अचानक जिला कृषि उपज मंडी का निरीक्षण किया. मंडी में व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ गई. किसानों के लिए न खाने की व्यवस्था थी, न पीने के पानी की, न ही ठहरने की और ना ही मुफ्त शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं इस मंडी में उपलब्ध थीं. इतना ही नहीं, तुलाई के नाम पर किसानों से अवैध वसूली किए जाने की शिकायत भी सामने आई. जिस मामले में कलेक्टर ने मौके पर ही अधिकारियों और कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए.
किसानों की समस्याएं सुनीं
कलेक्टर ने सबसे पहले किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं. किसान हल्कू पटेल ने बताया कि 25 से 30 किलोमीटर दूरस्थ गांवों से सभी किसान भाई अपनी उपज लेकर आते हैं. इस चिलचिलाती धूप में ना बैठने जगह है और ना गला गीला करने के लिए पानी आखिर हमारे साथ अन्याय क्यों?
किसानों की समस्या सुन कलेक्टर भड़क गये उन्होंने बारीकी से मंडी परिसर का जायजा लेते हुये माना कि परिसर में पेयजल व्यवस्था चरमराई हुई है, हीं किसानों के बैठने और ठहरने की समुचित व्यवस्था भी नहीं थी.
जांच के निर्देश दिए
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि किसानों से तुलाई के नाम पर 22 रुपये प्रति क्विंटल तक की अवैध वसूली की जा रही है. जिस पर एक्शन लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया और पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
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‘सुधर जाओ, नहीं तो ठीक नहीं होगा’
डीएम ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम देते हुए दो टूक शब्दों में कहा ” सुधर जाओ, नहीं तो ठीक नहीं होगा ” निरीक्षण के महज दो घंटे के भीतर किसानों के लिए पांच रुपये की थाली की व्यवस्था शुरू करवाई गई और पेयजल आपूर्ति को भी सुचारू कराया गया. इतना ही नहीं जो भी व्यपारी किसानों की उपज खरीदता है, उसका मोबाइल नंबर और पता यहां टीवी डिस्प्ले के माध्यम से दिखाया जायेगा.
कृषि प्रधान भारत में किसानों के प्रति चिंता और सुविधाओं को लेकर प्रशासन की यह त्वरित कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है. अब देखना होगा कि कलेक्टर के निर्देशों के बाद मंडी की व्यवस्थाएं कितनी स्थाई रूप से सुधरती हैं और किसानों को राहत मिलती है या नहीं.या फिर बदली हुई तस्वीर महज कुछ दिनों का ढकोसला है?