‘वर्तमान सरकार अंग्रेजी हुकूमत की तरह…’, बोले दिग्विजय सिंह, कहा- अंग्रेज जैसे प्रताड़ित करते थे, विरोध करने वालों का आज वही हाल
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
MP News: भोपाल स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय (PCC) में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की पूण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. दिग्विजय सिंह ने शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकारी कामकाज की तुलना ब्रिटिश हुकूमत से करते हुए कहा है कि आज देश में वहीं हालात हैं, जो आजादी के पहले अंग्रेजी हुकूमत के समय हुआ करते थे. उन्होंने कहा कि आज अगर कोई सरकार के खिलाफ बोलता है, तो उसे उसी तरह से प्रताड़ित किया जाता है, जैसे आजादी के पहले क्रांतिकारियों को अंग्रेज करते थे.
दिग्विजय सिंह ने नेहरू पर लगे दावों को किया खारिज
दिग्विजय सिंह ने नेहरू के जीवन पर चर्चा करते हुए उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया है कि पंडित नेहरू के कपड़े धुलने पेरिस जाते थे. उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू के रहन- सहन को लेकर फैलाई जा रही सभी बातें असत्य हैं. उन्होंने कहा कि जिन नौजवानों की पूरी शिक्षा विदेश में हुई और जिनके पिता नामी वकील थे, उन्होंने सभी सुख-सुविधा को छोड़कर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष को चुना. आज के समय में ऐसा त्याग करने वाला कोई नहीं है.
सरकार पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्तमान राजनीतिक माहौल पर निशाना साधते हुए कहा कि नेहरू ने जिस तरह से संपन्न परिवार से होने के बाद भी जेल की यात्राएं कीं, वह आज के युवओं के लिए बड़ी मिसाल है. सिंह ने आगे कहा कि आज जो हुकूमत देश में चल रही है. उस समय भी लोगों को ऐसे ही प्रताड़ित किया जाता था और आज भी वही हालात है. किसी ने भी वर्तमान सरकार के खिलाफ बोला तो उसके साथ क्या होता है, यह मुझे किसी को बताने की जरूरत नहीं है.
सांप्रदायिकता सबसे बड़ी चुनौती – दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने नेहरू की विचारधारा और उनकी किताब ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ का जिक्र करते हुए कहा कि सांप्रदायिकता के मुद्दे पर भी बेबाकी से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि नेहरू का मानना था कि सांप्रदायिकता द्वेष और नफरत को जन्म देती है.
दिग्विजय सिंह ने जोर देते हुए कहा कि, ‘अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता से कहीं ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता है और आज के समय में यही हमारे देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.