MP News: 4.5 लाख करोड़ के बजट पर घमासान तय, चार दिन विधानसभा में खर्च और कर्ज पर सीधी भिड़ंत!
मध्य प्रदेश विधानसभा(File Photo)
MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा में इस बार बजट सत्र के दौरान सियासी तापमान चरम पर रहने वाला है. 18 फरवरी को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 के लिए साढ़े 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश करेंगे. बजट पेश होते ही सदन में सरकार के खर्च, कर्ज और योजनाओं की प्राथमिकताओं को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस तय मानी जा रही है.
वित्त विभाग ने निर्देश जारी कर दिए हैं कि बजट प्रस्तुति के दिन सभी संबंधित अधिकारी अनिवार्य रूप से सदन में उपस्थित रहें. सामान्य चर्चा के बाद विभागवार अनुदान मांगों पर 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी और 5 मार्च को विस्तार से चर्चा होगी. संसदीय कार्य विभाग के अनुसार संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव चर्चा के दौरान सदन में मौजूद रहेंगे और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएंगे. अधिकारी दीर्घा में भी उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे.
कर्ज बनाम विकास का मुद्दा बनेगा केंद्र
राज्य पर पहले से 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है. ऐसे में जब बजट का आकार भी लगभग उतना ही या उससे थोड़ा अधिक होने जा रहा है, तो कांग्रेस इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है. विपक्ष का आरोप रहेगा कि सरकार कर्ज के सहारे योजनाओं का विस्तार कर रही है, जिससे भविष्य में वित्तीय बोझ बढ़ेगा. वहीं सत्तारूढ़ भाजपा इस बजट को विकासोन्मुख, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं को गति देने वाला बताएगी. सरकार का फोकस कृषि, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार, बुनियादी ढांचा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर रहने की संभावना है.
विभागवार होगी गहन पड़ताल
सामान्य चर्चा के बाद विभागवार अनुदान मांगों पर बहस के दौरान विपक्ष हर विभाग के खर्च और आवंटन पर सवाल उठाएगा. स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, ग्रामीण विकास और शहरी परियोजनाओं पर विशेष नजर रहेगी. कांग्रेस विधायक योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और फंड उपयोगिता प्रमाण पत्रों को मुद्दा बना सकते हैं. भाजपा विधायक सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए पिछले वर्षों की तुलना में बजट वृद्धि और नई घोषणाओं का बचाव करेंगे. संभावना है कि सदन में कई बार तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति भी बने.
राजनीतिक संदेश का मंच बनेगा सदन
बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं बल्कि सरकार की नीतिगत दिशा का संकेत भी होता है. ऐसे में यह सत्र 2026-27 की राजनीतिक और विकासात्मक प्राथमिकताओं को तय करेगा. कांग्रेस जहां इसे ‘कर्ज और दिखावटी घोषणाओं का बजट’ बताने की रणनीति बना रही है, वहीं भाजपा इसे ‘विकास और विश्वास का बजट’ करार देने की तैयारी में है. स्पष्ट है कि चार दिनों की विभागवार चर्चा के दौरान सदन में सरकार के हर खर्च और हर कर्ज की परत खोली जाएगी. विधानसभा का यह सत्र प्रदेश की वित्तीय सेहत और राजनीतिक तेवर दोनों की परीक्षा लेने वाला साबित हो सकता है.
ये भी पढ़ें: MP News: हेल्थ सिस्टम की नसबंदी! धार में 30 की जगह 180 महिलाओं का कर दिया ऑपरेशन