नौकरी पूरी लेकिन रिकॉर्ड अधूरे! मुरैना में शिक्षा विभाग से कई टीचर्स का लेखा-जोखा गायब, जांच के आदेश

Morena News: डीईओ कार्यालय ने अधूरे रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर संबंधित कार्यालयों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. विभागीय नियमों के अनुसार सेवा पुस्तिका, नियुक्ति आदेश, गोपनीय चरित्रावली और क्रमोन्नति संबंधी सभी दस्तावेज सुरक्षित एवं पूर्ण होना अनिवार्य है
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सांकेतिक तस्वीर

Morena News: (मनोज शर्मा की रिपोर्ट) मुरैना में शिक्षा विभाग में रिकॉर्ड संधारण की बड़ी लापरवाही उजागर होने के बाद हड़कंप मच गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि 35 वर्षों से सेवा दे रहे कई शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं से प्रथम नियुक्ति आदेश, गोपनीय चरित्रावली (सीआर), क्रमोन्नति आदेश और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब पाए गए हैं. मामले के सामने आते ही जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने जांच शुरू कराते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों को तत्काल रिकॉर्ड पूर्ण कराने के निर्देश जारी किए हैं.

रिकॉर्ड मिले गायब, पेंशन पर संकट

विभागीय जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं के पहले और दूसरे पृष्ठ तक उपलब्ध नहीं हैं. इतना ही नहीं, 12, 24 और 30 वर्ष की क्रमोन्नति से संबंधित महत्वपूर्ण आदेश भी रिकॉर्ड में नहीं मिले. ऐसे में कर्मचारियों के वेतन निर्धारण, वित्तीय लाभ और भविष्य में पेंशन संबंधी मामलों पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

डीईओ कार्यालय ने अधूरे रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर संबंधित कार्यालयों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. विभागीय नियमों के अनुसार सेवा पुस्तिका, नियुक्ति आदेश, गोपनीय चरित्रावली और क्रमोन्नति संबंधी सभी दस्तावेज सुरक्षित एवं पूर्ण होना अनिवार्य है, लेकिन वर्षों से चली आ रही लापरवाही अब सवालों के घेरे में है.

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आखिर 35 वर्षों तक रिकॉर्ड अधूरे कैसे रहे?

महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने के बावजूद किसी अधिकारी ने समय रहते जांच क्यों नहीं की? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर रिकॉर्ड प्रबंधन में कोई बड़ा खेल हुआ है? शिक्षकों के भविष्य और सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़े इस मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं. अब सभी की निगाहें जांच पर टिकी हैं कि गायब दस्तावेजों की जिम्मेदारी किस पर तय होती है.

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