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OBC क्रीमी लेयर पर MP हाई कोर्ट का अहम फैसला, सिर्फ वेतन से तय नहीं होगी पात्रता, सेवा और पद भी देखना जरूरी

Gwalior High Court

ग्वालियर हाई कोर्ट

MP News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने OBC क्रीमी लेयर को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को सिर्फ उसकी वर्तमान आय या वेतन के आधार पर क्रीमी लेयर में नहीं रखा जा सकता. इसके लिए नियुक्ति के समय पद, सेवा की श्रेणी, प्रमोशन की स्थिति और उम्र के साथ-साथ सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं पर भी विचार करना जरूरी है.

रागिनी राठौर ने प्रशासन के फैसले को दी चुनौती

यह मामला नर्मदापुरम की रागिनी राठौर से जुड़ा है. उनके पिता जिला जज के पद पर कार्यरत रहे हैं और उनकी सालाना आय करीब 16.99 लाख रुपए थी. इसी आय को आधार बनाते हुए प्रशासन ने रागिनी को OBC क्रीमी लेयर में मान लिया था और उनका जाति प्रमाण-पत्र जारी करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद रागिनी ने प्रशासन के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी.

पुराने आदेश हाई कोर्ट ने किए निरस्त

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कलेक्टर अशोकनगर और अपीलीय प्राधिकारी के पहले के आदेशों को निरस्त कर दिया. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को रागिनी के OBC जाति प्रमाण-पत्र के आवेदन पर सभी जरूरी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दोबारा निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों को यह प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी.

40 साल की सेवा के बाद बने क्लास-1 अधिकारी

रागिनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता ने करीब 40 साल तक सरकारी सेवा की. इसके बाद उन्हें प्रमोशन मिला और वे क्लास-2 से क्लास-1 अधिकारी बने. दलील दी गई कि ऐसी स्थिति में केवल वर्तमान वेतन को क्रीमी लेयर तय करने का आधार मानना उचित नहीं है. कोर्ट ने भी इसी पहलू को महत्वपूर्ण माना.

सिर्फ आय के आधार पर फैसला उचित नहीं

अधिवक्ता आदित्य सांघी के मुताबिक, यह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का इस मुद्दे पर पहला फैसला है. उन्होंने कहा कि OBC क्रीमी लेयर के मामलों में कई बार आय की सीमा को सीधे आधार बनाकर निर्णय कर दिया जाता है, जबकि संबंधित व्यक्ति के पद और सेवा संबंधी परिस्थितियों पर भी गौर किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान 11 अप्रैल 2026 के सुप्रीम कोर्ट के Rohith Nathan फैसले का भी हवाला दिया गया. दलील दी गई कि क्रीमी लेयर तय करते समय सामाजिक स्थिति और माता-पिता के पद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. केवल 8 लाख रुपए से अधिक आय होने के आधार पर किसी व्यक्ति को स्वतः क्रीमी लेयर में रखना उचित नहीं होगा.

OBC प्रमाण-पत्र पर अभी अंतिम फैसला नहीं

हालांकि, हाईकोर्ट के इस आदेश का यह अर्थ नहीं है कि रागिनी राठौर को OBC प्रमाण-पत्र जारी करने का अंतिम आदेश दे दिया गया है. कोर्ट ने सिर्फ पुराने आदेशों को रद्द करते हुए अधिकारियों को उनके आवेदन पर नियमों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर नए सिरे से फैसला लेने को कहा है. यह निर्णय छह सप्ताह के भीतर किया जाना है.

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