‘खाकी’ पर फिर उठे सवाल! बिजली विभाग के JE से मारपीट के आरोपियों को थाने से छोड़ने का आरोप; मुरैना में कर्मचारियों ने जाहिर किया गुस्सा
रामपुर कलां थाना.
Input- मनोज शर्मा
MP News: मुरैना जिले के रामपुर कलां थाना क्षेत्र में एक बार फिर खाकी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. सरकारी ड्यूटी पर तैनात विद्युत विभाग के कर्मचारियों पर हमला करने वाले आरोपियों को पुलिस द्वारा संरक्षण देने का एक कथित मामला सामने आया है. आरोप है कि रामपुर थाना प्रभारी की मनमानी के चलते जूनियर इंजीनियर (JE) के साथ मारपीट करने वाले नामजद आरोपियों को बिना किसी ठोस कार्रवाई के थाने से ही छोड़ दिया गया, जिससे विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है.
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामपुर कलां विद्युत वितरण केंद्र में पदस्थ जूनियर इंजीनियर (JE) विवेक यादव 16 जुलाई 2026 को अपने साथी कर्मचारियों के साथ ग्राम बेरखेड़ा में बकाया राशि की वसूली और ट्रांसफार्मर विच्छेद (काटने) की कार्रवाई करने गए थे. तभी शाम करीब 4:30 बजे गांव के कुछ दबंगों ने सरकारी काम में बाधा डालते हुए बिजली विभाग की टीम पर हमला बोल दिया.
गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी
जेई विवेक यादव द्वारा थाने में दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार मातादीन बघेल, अरविंद बघेल, सुनील कुशवाह समेत अन्य साथियों पर मारपीट का आरोप है. शिकायत में बताया गया है कि इन लोगों ने जेई और उनके साथी कर्मचारियों के साथ न सिर्फ गाली-गलौज किया, बल्कि धक्का-मुक्की करते हुए उनके साथ जमकर मारपीट भी की. इतना ही नहीं, आरोपियों ने सरकारी कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी तक दे डाली.
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति, आरोपियों को मिला अभयदान!
घटना के तुरंत बाद पीड़ित जेई विवेक यादव ने कर्मचारियों (शैलेंद्र शर्मा, शोहबत सिंह जादौन, रामकरन धाकड़, रुपेंद्र बाथम, दुर्गेश धाकड़) के हस्ताक्षरों के साथ रामपुर कलां थाना प्रभारी को एफआईआर (F.IR.) दर्ज करने हेतु लिखित आवेदन दिया. कार्यालय द्वारा आवेदन पर 16/07/2026 की सील भी लगाई गई.
सवाल ये है कि सरकारी कर्मचारियों के साथ ऑन-ड्यूटी मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर मामले में भी रामपुर पुलिस का रवैया बेहद ढीला रहा. सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसने के बजाय उन्हें थाने लाकर छोड़ दिया. इस घटना के बाद से बिजली कंपनी के अधिकारी और कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना है. कर्मचारियों का कहना है कि अगर शासकीय कार्य कर रहे अधिकारियों को ही पुलिस सुरक्षा नहीं दे सकती और आरोपियों को इस तरह छोड़ दिया जाएगा, तो फील्ड में काम करना नामुमकिन हो जाएगा. अब देखना यह है कि इस मामले में जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रामपुर थाना प्रभारी की इस कार्यप्रणाली पर क्या एक्शन लेते हैं.
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