हर्षानंदगिरी बनीं हर्षा रिछारिया, चमक-दमक वाली दुनिया छोड़ संन्यास अपनाया, उज्जैन में खुद का पिंडदान किया
हर्षा रिछारिया ने संन्यास अपनाया
Harsha Richhariya: प्रयागराज महाकुंभ से वायरल होने वाली हर्षा रिछारिया ने एक बार फिर संन्यास को अपना लिया है. उज्जैन के मंगलनाथ स्थित मौन तीर्थ में उन्होंने खुद का पिंडदान किया और हर्षा से हर्षानंदगिरी बन गईं. उन्होंने कहा कि अब जीवन भर इसी वेश में रहूंगी. उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरी महाराज ने दीक्षा दी है.
हर्षा रिछारिया ने क्या कहा?
हर्षा रिछारिया ने विस्तार न्यूज से बात करते हुए कहा कि नए शरीर को उन्होंने जन्म मिला है क्योंकि पुराने शरीर का तो पिंडदान हमने कर दिया है. नया शरीर जिसने जन्म लिया, हमने गुरु जी के सानिध्य में उनके मार्गदर्शन में तो ये जो शरीर है ये अब धर्म के लिए समर्पित है. ये अब पूरे समाज और देश के लिए समर्पित है.
‘मैं इन्फ्लुएंस करना चाह रही हूं’
संन्यास लेने के बाद हर्षा ने कहा कि मुझे याद है कि मेरा जब विरोध हो रहा था. तब ये भी बोला गया कि एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, एक नाचने गाने वाली ये सब कर रही है. अगर मैं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हूं तो ये मेरी जिम्मेदारी है कि मैं समाज के युवाओं को किस तरह से इन्फ्लुएंस करना पसंद करती हूं. उन्होंने आगे कहा कि मुझे अगर पसंद आ रहा है, पूरे कपड़े पहन के भगवा ओढ़कर धर्म की बात करना, इस तरह से अगर मैं इन्फ्लुएंस करना चाह रही हूं तो मुझे नहीं लग रहा कि इसमें कोई बुराई है.
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हर्षा ने कहा कि मेरा मोह भंग नहीं हुआ था ये गलत है. हां मैं कुछ समय विचलित हुई थी. मैं परेशान हुई थी क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा परेशान किया गया था. लेकिन मैंने कभी छोड़ने का नहीं सोचा. मैंने लोगों को भ्रमित करना चाहा था ताकि उनको यह लगे कि मैं छोड़ के जा रही हूं तो वो मुझे परेशान करना बंद कर दें और जो मैं करना चाह रही हूं वो मैं अपने काम पे ध्यान दे सकूं.