MP में 27% OBC आरक्षण मामले में HC ने जारी किया आदेश, 2 अप्रैल को सभी पक्ष पेश करें अपनी जानकारी

ओबीसी आरक्षण 27 परसेंट का अध्यादेश होते ही राज्य में कुल आरक्षण बढ़कर 64 परसेंट हो गया, जो कि सुप्रीम कोर्ट के तय मानक 50 परसेंट से कहीं ज्यादा है. इसी को आधार बनाकर छात्रा आशिता दुबे समेत कई अन्य अनारक्षित वर्ग के लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था.
Madhya Pradesh High Court (File Photo)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट(File Photo)

MP News: मध्य प्रदेश में 27 परसेंट ओबीसी आरक्षण मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है. हाई कोर्ट ने कहा कि 2 अप्रैल को सभी पक्ष अपनी जानकारी पेश करें. सभी पक्षों की जानकारी आने के बाद हियरिंग फाइनल की जाएगी. ओबीसी आरक्षण को लेकर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से जबलपुर हाई कोर्ट ट्रांसफर की गई हैं.

SC के आदेश के बाद HC में हो रही है सुनवाई

मध्य प्रदेश में 27 परसेंट ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को जबलपुर हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था. जिसके बाद सोमवार को जबलपुर हाई कोर्ट में 17 महीने बाद मामले में सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने सभी पक्षों से जानकारी पेश करने के लिए कहा है. हाई कोर्ट ने 2 अप्रैल के बाद 16 अप्रैल से फाइनल हियरिंग तय करने की बात कही है.

10 याचिकाओं पर हो रही है सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को 3 महीने के अंदर फैसला लेने के लिए कहा है. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को एक विशेष पीठ गठित करने का भी आदेश दिया है.

बता दें ओबीसी आरक्षण मामले में अनारक्षित वर्ग के लोगों ने साल 2019 में हाई कोर्ट में याचिका दी थी. इन सभी याचिकाओं को सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को वापस हाई कोर्ट के पास ट्रांसफर कर दिया है. हाई कोर्ट में 10 याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है. सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ओबीसी आरक्षण को लेकर मामला सुनाएगी.

कमलनाथ सरकार ने OBC आरक्षण बढ़ाकर 27 परसेंट किया था

दरअसल साल 2019 में कमलनाथ की सरकार ने मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14 परसेंट से बढ़ाकर 27 परसेंट करते हुए अध्यादेश जारी किया था. लेकिन ओबीसी आरक्षण 27 परसेंट का अध्यादेश आते ही राज्य में कुल आरक्षण बढ़कर 64 परसेंट हो गया, जो कि सुप्रीम कोर्ट के तय मानक 50 परसेंट से कहीं ज्यादा है. इसी को आधार बनाकर छात्रा आशिता दुबे समेत कई अन्य अनारक्षित वर्ग के लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

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