बुरहानपुर के केले को मिला GI टैग, किसानों और उद्योगों को मिलेगा नया विस्तार
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Input- मोसिम तड़वी
MP News: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के लिए गर्व की बात है कि यहां के प्रसिद्ध केले को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है. यह उपलब्धि जिले के किसानों की वर्षों की मेहनत, जनप्रतिनिधियों के सहयोग और प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है. जीआई टैग मिलने से बुरहानपुर केले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलेगी, जिससे किसानों, व्यापारियों और कृषि आधारित उद्योगों को व्यापक लाभ होने की संभावना है.
विशेष स्वाद और हाई क्वालिटी के लिए देशभर में मशहूर
बुरहानपुर जिले में केले की खेती का इतिहास वर्ष 1960 के आसपास से जुड़ा हुआ है. जिले की उपजाऊ भूमि, अनुकूल जलवायु और विशेष भौगोलिक परिस्थितियां यहां उत्पादित केले को अलग पहचान देती हैं. बुरहानपुर का केला अपने विशेष स्वाद, आकर्षक रंग और उच्च गुणवत्ता के कारण देशभर के बाजारों में पसंद किया जाता है. यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है और विदेशों में भी इसकी पहचान बनी हुई है.
18 हजार 640 किसान केले की खेती से जुड़े
वर्तमान में जिले के लगभग 18 हजार 640 किसान केले की खेती से जुड़े हुए हैं। जिले में करीब 26 हजार 120 हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती की जा रही है. यहां से हर वर्ष लगभग 18 लाख 28 हजार 400 मीट्रिक टन केले का उत्पादन होता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जीआई टैग मिलने के बाद बुरहानपुर केले की ब्रांड वैल्यू में और वृद्धि होगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा.
जीआई टैग मिलने से बुरहानपुर केले को नकली और अन्य क्षेत्रों के उत्पादों से संरक्षण भी मिलेगा. साथ ही निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग और बढ़ने की संभावना है. इससे कृषि आधारित उद्योगों और केला प्रोसेसिंग इकाइयों को भी नई पहचान मिलेगी.
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