Hanuman Ansh: विधायक गोलू शुक्ला ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, हनुमान अंश फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग
हनुमान अंश
Hanuman Ansh: इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर से बड़ी खबर सामने आ रही है. इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 से बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर ‘हनुमान अंश’ फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग की है. विधायक ने कहा है कि यह फिल्म सनातन संस्कृति से जुड़ी हुई है और इसमें हनुमान जी के स्वरूप को दिखाया गया है, इसलिए आम गरीब व्यक्ति भी इसे देख सके, इसके लिए फिल्म को टैक्स फ्री किया जाना चाहिए.
विधायक ने क्या कहा ?
MLA के मुताबिक यह फिल्म कैंची धाम के नीम करोली बाबा पर आधारित है और दर्शकों से इसे अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है. फिल्म की जबरदस्त पब्लिसिटी को देखते हुए थियेटर संचालकों ने टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, जोकि गलत है. विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि टिकट के दाम बढ़ने से गरीब और आम दर्शक फिल्म देखने से वंचित हो रहे हैं. सनातन आस्था से जुड़ी फिल्म होने के कारण इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहिए.
विधायक ने मुख्यमंत्री से फिल्म को टैक्स फ्री घोषित करने का आग्रह किया है. वहीं विधायक गोलू शुक्ला ने अपन विधानसभा क्षेत्र की जनता के लिए पहल करते हुए गुरुवार 10 तारीख को विधानसभा क्षेत्र 3 की जनता के लिए ‘हनुमान अंश’ का विशेष शो आयोजित करने का भी ऐलान किया है.
नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक संदेशों से प्रेरित फिल्म Hanuman Ansh ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता की एक नई और अद्भुत इबारत लिख दी है. पहले दिन महज 10 लाख रुपये की सुस्त शुरुआत करने वाली इस फिल्म ने केवल सकारात्मक वर्ड-ऑफ-माउथ और दर्शकों के भारी समर्थन के दम पर भारत में 81.41 करोड़ रुपये नेट (96.03 करोड़ रुपये ग्रॉस) का रिकॉर्ड आंकड़ा पार कर लिया है.
इस ऐतिहासिक व्यावसायिक सफलता के बीच, फिल्म के लेखक, निर्देशक और निर्माता डॉ. विशाल चतुर्वेदी (Dr Vishal Chaturvedi) ने एक इंटरव्यू में उस संघर्ष को याद किया है जब इस कहानी को एक प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म द्वारा अपमानजनक तरीके से खारिज कर दिया गया था. विशाल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया, ‘जब मैं अपनी कहानी पिच करने एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म के पास गया और महाराज जी (नीम करोली बाबा) की जीवन गाथा सुनाई, तो मैं इतना भावुक हो गया कि मेरी आंखों से आंसू बह निकले और मैं रो पड़ा. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया.’
उनके रवैये और भाषा से दुख हुआ
विशाल ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के रुख पर बेबाक बात रखते हुए आगे कहा, ‘हम फिल्म निर्माता हैं और अपने करियर में हजारों बार रिजेक्शन देखते हैं. यदि कहानी पसंद न आए, तो सम्मानपूर्वक ना कहा जा सकता है. लेकिन जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया और जिस तरह से फिल्म को ठुकराया गया, वह अपमानजनक था. इससे साफ पता चलता है कि उनके दिमाग में भारतीय संस्कृति और कहानियों को लेकर एक गलत नैरेटिव बैठा हुआ है. उसी वक्त मेरा संकल्प मजबूत हुआ कि इस गलत नैरेटिव को तोड़ना बेहद जरूरी है.’
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स द्वारा ठुकराए जाने के बावजूद, भारतीय दर्शकों ने इस आध्यात्मिक सिनेमा को जिस तरह से अपनाया है, उसने निर्देशक के विश्वास को पूरी तरह सच साबित कर दिया है. फिल्म की इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी को देखते हुए अब मेकर्स ने इसके सीक्वल की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं.
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