Indore: भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में MIC और जनप्रतिनिधियों को मिली क्लीन चिट, अधिकारियों की बढ़ी मुश्‍कि‍लें

Indore News: Inquiry Commission (जांच आयोग) की रिपोर्ट में MIC और जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट मिल गई है. रिपोर्ट में अधिकारियों की कार्यशैली पूर तरह से उजागर हो गई है.
Bhagirathpura Contaminated Water Incident

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड

Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा दूषि‍त पानी कांड में बड़ा अपडेट सामने आया है. इस पूरे मामले में Inquiry Commission (जांच आयोग) की रिपोर्ट में MIC और जनप्रतिनिधियों को क्लीन चिट मिल गई है. वहीं कमीशन की रिपोर्ट में अधिकारियों की कार्यशैली पूर तरह से उजागर हो गई है. दूषित पानी कांड में रोहित सीसोनिया, संजीव श्रीवास्‍तव, संदीप सोनी सहित अन्‍य अधिकारियों को दोषी पाया गया है.

न्‍याय‍िक स‍मिति की रिपोर्ट में कई अहम तथ्‍य आए सामने

इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में हुई 36 मौतों की जांच के लिए गठित हुई हाई कोर्ट की एक सदस्‍यीय न्‍याय‍िक स‍मिति ने अपनी रिपोर्ट में कई अहम तथ्‍यों को सामने रखा है. हालांकि रिपोर्ट काे फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया है. लेकिन रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी सामने आ गई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 36 मौतों में से 24 को दूषित पानी से हुई मौत माना है, वहीं 12 मौतों के मामले अभी स्थिति को स्‍पष्ट नहीं बताया है.

अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल

रिपोर्ट में दूषित पानी की समस्‍या के पीछे पाइपलाइन से जुड़े काम में देरी काे अहम कारण बताया गया है. रिपोर्ट में सामने आया कि यदि समय पर पाइपलाइन का काम किया जाता और उसे बदल दी जाती तो दूषित पानी की स्थिति नहीं बनती. जांच में संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में पाइपलाइन के काम और टेंडर की प्रक्रिया में देर को लेकर अधिकारियों की भूमिका की पूरी तरह से जांच की गई है.

इस रिपोर्ट में नगर निगम के जल विभाग के अधि‍कारियों की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण माना गया है, साथ ही टेंडर प्रक्रिया में देरी और संबंधित स्‍तर पर बरती गई लापरवाही का उल्लेख होने की बात भी सामने आई है. हालांकि जांच की आधिकारिक प्रति सर्वजानिक नहीं की गई है. रिपोर्ट में दर्ज निष्‍कर्षों पर अंतिम रूप कोर्ट की सुनवाई और आदेश के बाद ही होगा. पूरे मामले में याचिकाकर्ता ने रिपोर्ट को सार्वजानिक करने और इसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है.

जनप्रतिनिधि और MIC मेंबर को क्लीन चिट

जांच रिपोर्ट में सामने आई जानकारी में सबसे अहम बात यह रही कि इसमें किसी भी जनप्रतिनिधि को घटना का जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है. वहीं नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) को भी पूरे मामले में क्लीन चिट देने की बात सामने आई है. इस रिपोर्ट में किसी बड़े अधिकारियों की भूमिका भी सामने नहीं आई और उनकी भी जिम्मेदारी तय नहीं की गई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक जांच कमेटी ने घटना की जिम्मेदारी मुख्‍य रूप से प्रशासनिक और तकनीकी स्‍तर पर तय करने की दिशा में निष्‍कर्ष दिए गए हैं.

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