दमोह में भारी बारिश से बर्बाद हुई मक्के की फसल, किसानों ने राज्य सरकार से की मुआवजे की मांग
दमोह: भारी बारिश से मक्के की फसल बर्बाद
Damoh News: मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही भारी बारिश से देश का अन्नदाता परेशान है. बात करें यदि बुंदेलखंड अंचल की तो बीते 3 दिन पहले से मौसम वैज्ञानिको ने ग्रामीण इलाकों में भारी बारिश होने की एडवाजरी जारी की थी.
20 एकड़ में लगी मक्के की फसल बर्बाद
वहीं, दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में मंगलवार (29 जुलाई) को हुई जोरदार बारिश से घुटारिया ग्राम का डहरा नाला पहले से ही किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ था. जिसकी बर्बादी की मार फिर एक बार किसानों को झेलनी पड़ी, जंगल में हुई तेज बारिश का पानी डहरा नाले से होता हुआ किसानों के खेतों में जा घुसा. जिससे दर्जन भर से ज्यादा किसानों की करीब 20 एकड़ मक्का की फसल बर्बाद हो गई. इस गांव के अधिकांश किसान आदिवासी है, जिनकी फसलें पानी के तेज बहाव के साथ बह गई.
मानसून में देरी से बुवाई लेट हुई
प्राकृतिक आपदा की मार झेलने वाले किसानों में तंम्मु गौंड, महेश गौंड, अठई आदिवासी, सत्तू आदिवासी, देवेंद्र गौंड, पहाड़ी आदिवासी, सुरेश आदिवासी सहित कई किसानों को आर्थिक नुकसान पंहुचा है. किसान सत्तू आदिवासी का कहना है कि इस साल मानसून देर से आया तो बुवाई लेट हो गई. अभी मक्के की फसल महज 1 से 2 महीने की ही हुई थी. जिसके बीज को भी कर्ज लेकर दुकान से खरीदा था. अचानक हुई तेज बारिश और डहरा नाले से बहकर खेतों तक पहुंचे पानी ने फसल को पूरी तरह से नष्ट कर दिया.
पटवारी का क्या कहना है?
बगदरी हल्का पटवारी अरविंद चतुर्वेदी का कहना है कि शासन से अभी गिरदावरी करने के निर्देश प्राप्त नहीं हुए है. बिना गिरदावरी के कह पाना मुश्किल है कि कितने किसानों ने कितने एकड़ में मक्का की फसल बोई थी.
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‘पटवारी को भेजकर सर्वे कराएंगे’
वहीं, इस पूरे मामले में तहसीलदार डॉ विवेक व्यास ने बताया कि आगामी 5 तारीख तक शासन से निर्देश प्राप्त होने की संभावना है कि जिन-जिन इलाकों में भारी बारिश से किसानों की फसलें चौपट हुई हैं. वहां पटवारी को भेजकर सर्वे करवाया जाएगा. जिन किसानों को नुकसान हुआ तो उन्हें सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की राशि दी जायेगी.