27% OBC आरक्षण का मामला: MP HC में सुनवाई टली, याचिकाकर्ताओं के वकील नहीं हुए हाजिर, 24 जून को होगी हियरिंग

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछले 7 सालों से मामला सुलझ नहीं पा रहा है. दरअसल कांग्रेस की कलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण की सीमा 14 परसेंट से बढ़ाकर 27 परसेंट कर दी थी. लेकिन इस आरक्षण के साथ ही राज्य में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत के पार हो गया. जिसके खिलाफ कोर्ट में याचिकाएं दी गई हैं.
Madhya Pradesh High Court (File Photo)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट(File Photo)

MP News: मध्य प्रदेश में 27 परसेंट ओबीसी आरक्षण को लेकर मंगलवार को होने वाली सुनवाई टल गई है. बताया जा रहा है कि आज याचकाकर्ताओं के वकील हाजिर नहीं हुए थे. जिसके कारण सुनवाई को टालना पड़ा. अब 24 जून से फिर से याचिकाओं पर सुनवाई होगी. चीफ जस्टिस संदीप सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट जाने के कारण अब नई बेंच केस की सुनवाई करेगी. अब मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट में होगी.

15 मई को आखिरी बार हुई थी सुनवाई

ओबीसी आरक्षण पर आखिरी बार 15 को सुनवाई हुई थी. तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने मामले में 13, 14, और मई लगातार सुनवाई की थी. लेकिन इसके बाद जस्टिस संदीप सचदेवा सुप्रीम कोर्ट चले गए. मामले में सुनवाई की तारीख 16 जून मुकर्रर की गई थी. लेकिन वकीलों के कोर्ट में ना पहुंचने के कारण सुनवाई टाल दी गई.

7 सालों से नहीं हो पा रहा है फैसला

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछले 7 सालों से मामला सुलझ नहीं पा रहा है. दरअसल कांग्रेस की कलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण की सीमा 14 परसेंट से बढ़ाकर 27 परसेंट कर दी थी. लेकिन इस आरक्षण के साथ ही राज्य में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत के पार हो गया. जबकि नियम के मुताबिक किसी भी राज्य में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत रखी गई हैं. आरक्षण के विरोध में कई याचिकाएं हाई कोर्ट में दी गई थीं. मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस मध्य प्रदेश कोर्ट ट्रांसफर कर दिया.

सरकार की तरफ से विशेष परिस्थितियों के बारे में नहीं बताया गया

दरअसल पिछली बार जब हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी तो दोनों पक्षों की तरफ से दलीलें सुनी गई थीं. कोर्ट में इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ और एम नागराज मामलों का हवाला दिया गया था. जिसमें कहा गया था फैसले के मुताबिक 50 परसेंट से ज्यादा किसी भी राज्य में आरक्षण नहीं हो सकता है. विशेष परिस्थितियों में ऐसा किया जा सकता है. लेकिन एमपी सरकार की तरफ से अभी तक विशेष परिस्थितियों का जिक्र नहीं किया गया है. फिलहाल अब 24 जून को एकबार फिर मामले में सुनवाई की जाएगी.

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