‘ग्रीन एम्बुलेंस वाले मोहन ठाकुर…’, पौधों की परवरिश को बना लिया जीवन का मिशन, शहर में लगे पौधों की रोज करते हैं देखभाल

MP News: पौधों को बचाने और उनकी देखभाल का बीड़ा जबलपुर के मोहन सिंह ठाकुर ने उठाया है. वे अपनी अनोखी 'ग्रीन एम्बुलेंस' लेकर उन पौधों की सेवा करने निकल पड़ते हैं, जिन्हें लोग लगाकर भूल चुके हैं.
Mohan Thakur of the Green Ambulance

ग्रीन एम्बुलेंस वाले मोहन ठाकुर

MP News: भावी पीढ़ी को सुरक्षित रखना है तो पर्यावरण को बेहतर बनाना होगा. इसके लिए पौधारोपण जरूरी है और देशभर में बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान भी चलाए जा रहे हैं. लेकिन अक्सर यह अभियान केवल पौधे लगाने तक ही सीमित रह जाता है. देखरेख के अभाव में रोपित किए गए पौधे कुछ समय बाद सूख जाते हैं. ऐसे पौधों को बचाने और उनकी देखभाल का बीड़ा जबलपुर के मोहन सिंह ठाकुर ने उठाया है. वे अपनी अनोखी ‘ग्रीन एम्बुलेंस’ लेकर उन पौधों की सेवा करने निकल पड़ते हैं, जिन्हें लोग लगाकर भूल चुके हैं.

रिटायरमेंट के बाद चुना पर्यावरण संरक्षण का रास्ता

करीब 65 वर्षीय मोहन सिंह ठाकुर चाहते तो अपनी सेवानिवृत्ति की जिंदगी आराम से बिता सकते थे, लेकिन उन्होंने कुछ अलग करने का संकल्प लिया. उन्होंने उन पौधों की रक्षा की जिम्मेदारी उठाई, जिन्हें लोग रोपित करने के बाद भूल जाते हैं. इसके लिए उन्होंने अपनी पुरानी कार को एक विशेष ‘ग्रीन एम्बुलेंस’ में बदल दिया. रोज सुबह मोहन ठाकुर अपनी ग्रीन एम्बुलेंस लेकर शहर के अलग-अलग इलाकों में निकलते हैं और पौधों की देखभाल करते हैं.

ग्रीन एम्बुलेंस में मौजूद हैं पौधों की देखभाल के सभी संसाधन

मोहन ठाकुर की ग्रीन एम्बुलेंस बेहद खास है. इसमें पौधों की देखभाल के लिए आवश्यक सभी संसाधन मौजूद रहते हैं. कार के अंदर करीब 180 लीटर क्षमता की पानी की टंकी फिट की गई है. वे जहां भी जाते हैं, वहां लगे पौधों को पानी देते हैं, खाद डालते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सहारा देने के लिए बांस-बल्लियों का उपयोग करते हैं. इसके अलावा ग्रीन एम्बुलेंस में जैविक खाद तैयार करने के औजार और नए स्थानों पर पौधारोपण के लिए पौधे भी रखे रहते हैं.

पौधे पेड़ बनने तक करते हैं उनकी देखभाल

संजीवनी नगर निवासी और पावर ग्रिड से सेवानिवृत्त सीनियर जनरल मैनेजर मोहन सिंह ठाकुर गुलौआ ताल, संजीवनी नगर, शैलपर्ण उद्यान, देवताल सहित कई स्थानों पर पौधारोपण करते हैं. इतना ही नहीं, वे उन पौधों की तब तक देखभाल करते हैं, जब तक वे पेड़ का रूप नहीं ले लेते. मोहन ठाकुर का कहना है कि उन्हें प्रकृति से बेहद लगाव है. यही कारण है कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना पूरा समय पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया है.

पानी की व्यवस्था के लिए बनाई अनोखी प्रणाली

मोहन ठाकुर बताते हैं कि पौधों को पर्याप्त पानी मिल सके, इसके लिए उन्होंने अपनी कार को ग्रीन एम्बुलेंस के रूप में तैयार किया है. इसमें एक बड़ी पानी की टंकी के साथ चार से पांच लीटर क्षमता वाली कई बोतलों की व्यवस्था भी की गई है. वे जहां भी पौधे लगाते हैं या किसी सूखते हुए पौधे को देखते हैं, वहां अपनी ग्रीन एम्बुलेंस के साथ पहुंचकर उसकी सिंचाई करते हैं.

उनका कहना है कि लोग पौधारोपण तो कर देते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण काम यानी पौधों की देखभाल करना भूल जाते हैं. लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उचित देखरेख नहीं होने के कारण वे सूख जाते हैं. यदि समय रहते उनकी देखभाल की जाए तो वे लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं और आगे चलकर विशाल पेड़ों का रूप ले सकते हैं.

ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीक से बचा रहे हैं पौधे

मोहन ठाकुर ने सीमित पानी में पौधों को जीवित रखने का भी एक अनोखा तरीका अपनाया है. वे पौधे के पास लगभग चार से पांच लीटर की प्लास्टिक की बोतल को करीब आठ इंच गहराई तक मिट्टी में दबा देते हैं. बोतल के निचले हिस्से में एक छोटा छेद करके उसमें सूती धागा लगाया जाता है. इस धागे के माध्यम से पानी धीरे-धीरे रिसता रहता है और ड्रिप सिंचाई की तरह सीधे पौधे की जड़ों तक पहुंचता है. इससे कम पानी में भी पौधों को लगातार नमी मिलती रहती है.

युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

मोहन ठाकुर के इस सराहनीय कार्य को देखकर अब कई लोग उनके साथ जुड़ने लगे हैं. खासकर युवाओं में उनके काम को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है. युवाओं का कहना है कि जब उन्होंने मोहन ठाकुर को पौधों की सेवा करते देखा तो उनके भीतर भी पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी. आज वे उनके साथ मिलकर पौधों की देखभाल कर रहे हैं, ताकि लगाए गए पौधे समय के साथ स्वस्थ पेड़ों का रूप ले सकें और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल

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