Bhopal Metro: दिन का खर्च 8 लाख, कमाई 15 हजार…तीन महीने में तीसरी बार घटे भोपाल मेट्रो के फेरे
भोपाल मेट्रो
Bhopal Metro: भोपाल मेट्रो में आपका स्वागत है…लेकिन अब सवाल यह उठने लगा है कि आखिर इस सेवा का इस्तेमाल कौन कर रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं की शुरुआती दौर में सरकार के लिए भोपाल मेट्रो घाटे का सौदा बन गई है. इस तरह की खबरें इसलिए सामने आ रही हैं क्योंकि महज तीन महीनों में ही भोपाल मेट्रो आर्थिक संकट से जूझ रही है. आइए विस्तार से समझते है इस पूरे मामले में घाटे-मुनाफे की गुणा गणित.
रोज का खर्चा भी वसूल नहीं हो रहा
बीते तीन महीनों में भोपाल मेट्रो के हालात ये हो चुके है कि अब रोज का खर्चा भी वसूल नहीं हो रहा. जहां रोज़ाना इसके संचालन पर करीब 8 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, वहीं आमदनी महज 13 से 15 हजार रुपये तक सिमट गई है. लगातार घटती यात्रियों की संख्या ने मेट्रो की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है, जिसके चलते इसके फेरे और संचालन समय में तीसरी बार बदलाव करना पड़ा है.
यात्रियों की संख्या लगातार गिरती चली गई
शुरुआत में मेट्रो को लेकर लोगों में उत्साह था और पहले कुछ दिनों में करीब 7 हजार यात्री रोज़ाना सफर कर रहे थे. इससे उम्मीद जगी थी कि आने वाले समय में संख्या और बढ़ेगी, लेकिन इसके उलट यात्रियों की संख्या लगातार गिरती चली गई. इसका असर सीधे मैट्रो के फेरों पर पड़ा हैं. शुरुआत में जहां मेट्रो जहां रोजाना 17 फेरे लगाती थी, लेकिन जनवरी में इसके फेरों की संख्या 13 कर दी गई.
मेट्रो के फेरों में कटौती
अब एक बार फिर से मेट्रो के फेरों में कटौती हुई है, अब इनकी संख्या 9 कर दी गई है. सिर्फ फेरे ही नहीं मेट्रों के संचालन के समय में भी बदलाव हुआ है. अब मेट्रो सेवा सुबह 11:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक ही सीमित कर दी गई है, जो दर्शाता है कि मांग के अनुसार सेवा को सीमित किया जा रहा है.
100 से 150 यात्री कर रहे हैं सफर
भोपाल मेट्रो में रोज़ाना सिर्फ 100 से 150 यात्री ही सफर कर रहे हैं. यात्रियों की इस भारी कमी ने मेट्रो प्रबंधन को अपने ऑपरेशनल फैसलों पर बार-बार पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है. खर्च और आय के बीच यह बड़ा अंतर परियोजना की व्यवहारिकता पर सवाल खड़े कर रहा है.