रणनीति तैयार, संख्या भी साथ… फिर कैसे हाथ से फिसल गई कांग्रेस की सीट? जानें आखिरी 3 घंटे की इनसाइड स्टोरी
कैसे मीनाक्षी के हाथ से निकली सीट
मध्य प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में ऐसा उलटफेर हुआ है, जिसने कांग्रेस की पूरी रणनीति को ध्वस्त कर दिया. जिस सीट को लेकर कांग्रेस सुबह तक जीत के दावे कर रही थी, उसी सीट पर शाम होते-होते उसका उम्मीदवार चुनावी मैदान से बाहर हो गया. कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा जीत की ओर बढ़ गई है. अब कांग्रेस इसे लोकतंत्र की हत्या बता रही है, जबकि भाजपा इसे नियमों और चुनावी प्रबंधन की जीत कह रही है.
मध्यप्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट का चुनाव इस बार मतदान से पहले ही सियासी संग्राम में बदल गया. कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था और पार्टी को भरोसा था कि सभी विधायक एकजुट हैं. सोमवार सुबह नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर कांग्रेस विधायकों की बैठक हुई. नेताओं ने एकजुटता दिखाई और भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगाए.
कैसे पलट गई पूरी तरह से बाजी
विधानसभा सचिवालय में तस्वीर बदलने लगी. नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान भाजपा नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आपत्ति दर्ज कराई. भाजपा का आरोप था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र और शपथ पत्र में एक न्यायालयीन मामले की जानकारी का खुलासा नहीं किया है. आपत्ति के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मामले की सुनवाई शुरू कर दी.
जैसे-जैसे सुनवाई आगे बढ़ी, कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेता विधानसभा पहुंचने लगे। दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और मीनाक्षी नटराजन खुद विधानसभा पहुंचे। दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता भी डटे रहे। रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई। नारेबाजी, धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा।
तीन घंटे तक चलता रहा ड्रामा
करीब तीन घंटे तक चले इंतजार के बाद शाम साढ़े छह बजे वह फैसला आया जिसने कांग्रेस को झटका दे दिया. रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया. आदेश में कहा गया कि उम्मीदवार द्वारा आवश्यक जानकारी का खुलासा नहीं किया गया, इसलिए नामांकन वैध नहीं माना जा सकता.
कांग्रेस में छा गई मायूसी
फैसले के बाद भाजपा खेमे में उत्साह छा गया. वहीं कांग्रेस दफ्तर में मायूसी साफ दिखाई दी. पार्टी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसले को लोकतंत्र पर हमला बताया है. जीतू पटवारी ने इसे मध्यप्रदेश के इतिहास का काला अध्याय कहा, जबकि मीनाक्षी नटराजन ने इसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला करार दिया.
घर के भेदी का पता लगाने में लगी कांग्रेस
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और सवाल कांग्रेस के सामने खड़ा हो गया है. आखिर वह जानकारी भाजपा तक कैसे पहुंची जिसके आधार पर आपत्ति लगाई गई. पार्टी के भीतर अब इस बात की पड़ताल शुरू हो गई है कि कहीं संगठन के अंदर से ही संवेदनशील जानकारी बाहर तो नहीं गई.
कांग्रेस के कई नेता अब “घर के भेदी” की तलाश की बात कर रहे हैं. क्योंकि सभी विधायक 11:00 बजे नेता प्रतिपक्ष की आवास पहुंच गए और वहां से फिर एयरपोर्ट पर तेलंगाना जाने के लिए बैठे रहे. 3 घंटे फ्लाइट डिले हुई और उसके बाद वापस जोश में रहने वाले कांग्रेसी रात में बेहोश हो गए और उन्हें वापस लौटना पड़ा.
कांग्रेस ने शुरू किया प्रदर्शन
नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने रात में ही निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया. अगले दिन विधायक और नेता फिर सड़कों पर उतर आए. भोपाल से लेकर दिल्ली तक चुनाव आयोग के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया. मीनाक्षी नटराजन कानूनी सलाह के लिए दिल्ली रवाना हो गईं और पार्टी अब अदालत जाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है.
क्या हैं इस पूरी घटना के राजनीतिक मायने
राज्यसभा की यह सीट भले ही संख्या के लिहाज से एक हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बड़े हैं. भाजपा इसे अपनी रणनीतिक जीत मान रही है, जबकि कांग्रेस चुनाव आयोग और अदालत के जरिए इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की तैयारी में है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस कानूनी लड़ाई में कोई राहत हासिल कर पाएगी या फिर राज्यसभा की तीसरी सीट भाजपा के खाते में चली जाएगी.
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