MP News: विधायक निर्मला सप्रे का दलबदल मामला, सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए HC से समय मांगा, 29 अप्रैल को अगली सुनवाई

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर मामले में देरी कर रही है और अपना जवाब दाखिल नहीं कर रही.
MP High Court (File Photo)

MP हाई कोर्ट(File Photo)

MP News: बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले में सुनवाई की. इस दौरान सरकार की तरफ से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा है. सरकार की तरफ से बताया गया कि अभी तक विधानसभा अध्यक्ष के सामने सुनवाई नहीं हो सकी. जिसके बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए विधानसभा अध्यक्ष के सामने 22 अप्रैल और अदालत में 29 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है.

9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष नहीं हो सकी सुनवाई

सरकार ने हाई कोर्ट में बताया कि महाअधिवक्ता भोजशाला मामले में व्यस्त हैं. जिसके कारण विधानसभी अध्यक्ष के सामने 9 अप्रैल को सुनवाई नहीं हो सकी थी. इसलिए सरकार ने कोर्ट से समय मांगा था. वहीं सुनवाई के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर मामले में देरी कर रही है और अपना जवाब दाखिल नहीं कर रही.

निर्मला सप्रे बोलीं- मैं कांग्रेस में हूं

दरअसल कांग्रेस का का कहना है कि बीना विधायक निर्मला सप्रे बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं. लेकिन दलबदल को लेकर विधायक ने कुछ दिन पहले कहा था कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली है और वह कांग्रेस में ही हैं. जिसके बाद कोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से विधायक के भाजपा में शामिल होने का सबूत मांगा था. जिसके बाद सिंघार ने कोर्ट में 9 अप्रैल को पार्टी व्हीप की कॉपी प्रस्तुत की थी. जिसके बाद अब कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है.

कांग्रेस का दावा- मई 2024 में BJP में शामिल हुईं निर्मला सप्रे

दरअसल कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे लोकसभा चुनाव के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के साथ नजर आईं थीं. मुख्यंमंत्री चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस कार्यक्रम में सप्रे भी शामिल हुईं थीं. कांग्रेस का कहना है कि मई 2024 से ही निर्मला सप्रे बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं. बता दें निर्मला सप्रे साल 2023 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बनीं थीं.

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