MP News: नामांतरण के लिए नियम हुए सख्‍त, अब एमओयू और एग्रीमेंट से नहीं होगी संप‍त्त‍ि ट्रांसफर, नए निर्देश जारी

MP News: नामांतरण कराने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने नए निर्देश जारी किए हैं. अब एमओयू, अनुबंध या पार्टनरशिप जैसे दस्तावेजों को नामांतरण का आधार नहीं माना जाएगा.
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सांकेतिक तस्‍वीर

MP News: भोपाल शहर में नामांतरण कराने वाले लोगों के लिए प्रशासन ने नए निर्देश जारी किए हैं. अब एमओयू, अनुबंध या पार्टनरशिप जैसे दस्तावेजों को नामांतरण का आधार नहीं माना जाएगा. तहसील कार्यालयों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि केवल वैध और निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर ही नामांतरण किया जाए. दरअसल, हाल के दिनों में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन सामने आए थे, जिनमें रजिस्टर्ड डीड के बजाय अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया जा रहा था. इसे देखते हुए प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए नियम स्पष्ट कर दिए हैं. प्रदेश और जिले में अब नामांतरण के लिए खरीद-बिक्री की रजिस्टर्ड डीड, विरासत, गिफ्ट डीड, वसीयत, बंटवारा, कोर्ट आदेश, पट्टा या अधिकार पत्र जैसे दस्तावेज ही मान्य होंगे.

मर्जर एग्रीमेंट पर सख्ती

प्रशासन के मुताबिक, कई मामलों में कंपनियों के मर्जर एग्रीमेंट के आधार पर नामांतरण के आवेदन दिए जा रहे थे. फिलहाल नजूल क्षेत्रों में ऐसे 100 से ज्यादा मामले लंबित हैं. मर्जर होने पर कंपनी का संचालन तो जारी रहता है, लेकिन संपत्ति का स्वामित्व स्वतः स्थानांतरित नहीं होता. कुछ अन्य राज्यों की हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देकर यहां भी ऐसे आवेदन किए जा रहे थे. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत केवल रजिस्टर्ड डीड ही मान्य है, इसलिए अन्य दस्तावेजों पर आधारित आवेदन अमान्य माने जाएंगे.

प्रतिदिन हो रहे 700 आवेदन

वर्तमान में रोजाना करीब 700 नामांतरण आवेदन दर्ज हो रहे हैं. इनमें से लगभग आधे आवेदन पारिवारिक संपत्ति, बंटवारे और वसीयत से जुड़े होते हैं, जबकि 30 प्रतिशत आवेदन खरीद-बिक्री से संबंधित होते हैं. शेष 15 प्रतिशत आवेदन अन्य दस्तावेजों के आधार पर किए जा रहे हैं, जिन पर अब सख्ती की जा रही है. प्रशासन ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न हो. पहले भी हुजूर तहसील में एक हाई-प्रोफाइल संपत्ति के नामांतरण को लेकर विवाद सामने आ चुका है, जिसके बाद इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई

इसके अलावा, शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी गई है. करीब 70 कॉलोनियों के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिनमें से 63 मामलों में नामजद शिकायत दर्ज हो चुकी है. प्रशासन ने 33 कॉलोनियों में रजिस्ट्री और नामांतरण पर पूरी तरह रोक लगा दी है. कई इलाकों में अवैध निर्माणों को हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई भी की गई है. रातीबड़, नीलबड़, पिपलिया बरखेड़ी, अमरावदकलां, शोभापुर, रोलूखेड़ी, कालापानी, पचामा, विदिशा रोड, बैरसिया रोड, करोंद और भौंरी जैसे क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की संख्या अधिक पाई गई है.

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