रीवा-मऊगंज के 8 सरकारी अस्पतालों का संचालन होगा आउटसोर्स, पायलट प्रोजेक्ट से क्या-क्या बदलेगा?
मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला
Private Agency Manages Rewa Hospitals: मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था बदलने की तैयारी की है. जिसके तहत रीवा और मऊगंज जिले के 8 सीएचसी सेंटर के संचालन की व्यवस्था बदली जाएगी. विभाग ने इसके संचालन के लिए आउटसोर्स करने की मंजूरी दी है. अब इन सीएचसी सेंटर का जिम्मा निजी कंपनियों को दिया जाएगा. जिसकी समय-सीमा 5 सालों तक रहेगी.
पायलट प्रोजेक्ट के तहत अभी रीवा और मऊगंज जिले की 8 सीएचसी (चाकघाट, गंगेव, गुढ़, रायपुर कर्चुलियान, रीठी, गोविंदगढ़, हनुमना और नईगढ़ी) आउटसोर्स व्यवस्था के तहत संचालित किए जाएंगे. यह पायलट प्रोजेक्ट का पहला हिस्सा है. जिसके तहत 5 सालों तक निजी एजेंसी को अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी. एजेंसी का चयन टेंडर प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा.
30 बेड के अस्पताल में 41 स्टाफ
विभाग ने 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए कुल 41 कर्मचारियों का मानव संसाधन निर्धारित किया है. जिसमें 10 डॉक्टर, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जरी विशेषज्ञ, 10 नर्स, स्त्री रोग विशेषज्ञ, 3 मेडिकल अधिकारी, 1 दंत चिकित्सक, फार्मासिस्ट, अकाउंटेंट-कम-स्टोरकीपर-क्लर्क, रेडियोग्राफर, वार्ड बॉय, 2 लैब टेक्नीशियन और 2 एएनएम शामिल हैं. इसके अलावा अस्पताल की सुरक्षा तीन शिफ्ट में लगाई जाएगी.
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आउटसोर्स के बाद क्या बदल जाएगा?
आउटसोर्स को सीएचसी सेंटर के संचालन का जिम्मा मिलने के बाद क्या-क्या बदल जाएगा? इसको लेकर सबके मन में सवाल पैदा हो रहा है. विभाग के अनुसार, जरूरी सरकारी दवाएं और टीके विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे. जबकि ओपीडी, आईपीडी और ऑपरेशन के लिए आवश्यक दवाएं तथा दूसरी जरूरी मेडिकल सामग्री भी सरकार उपलब्ध कराएगी. वहीं अस्पताल के संचालन, स्टाफ, सुरक्षा, सफाई और रखरखाव जैसी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी निजी एजेंसी की होगी.