सागर: सोने के दौरान गले में फंसा नकली दांत, सांस न ले पाने के कारण बिगड़ी हालत, एंडोस्कोपी से बचाई गई जान

False Tooth Choked While sleeping in Sagar: सागर में रात में मुंह से निकला नकली दांत सीधे सांस की नली में फंस गया, जिससे 56 वर्षीय व्यक्ति की हालत अचानक बिगड़ने लगी. हालांकि डॉक्टरों की सूझबूझ के कारण मरीज की जान बच गई.
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर

Life Saved After Endoscopy: मध्‍य प्रदेश के सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में डॉक्टरों की सूझबूझ ने एक 56 वर्षीय व्यक्ति को नई जिंदगी दी है. दमोह जिले के रहने वाले इस व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी थी. सांस लेने में परेशानी बढ़ती जा रही थी और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा था. शुरुआत में परिवार को बीमारी की असली वजह समझ नहीं आई, लेकिन जांच के दौरान जो सामने आया उसने सभी को हैरान कर दिया.

दरअसल, मरीज के मुंह में लगे नकली दांतों का सेट रात के दौरान अपनी जगह से निकल गया था. परिवार को लगा कि दांत कहीं गिर गया होगा, लेकिन कुछ ही घंटों बाद व्यक्ति को तेज सांस फूलने और बेचैनी की शिकायत होने लगी. हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत बीएमसी के ईएनटी विभाग में भर्ती कराया गया.

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मरीज की सांस नली में फंसी वस्तु का पता नहीं चल पा रहा था. जांच के दौरान शक हुआ कि कोई बाहरी चीज सांस की नली में चली गई है, लेकिन प्लास्टिक से बना नकली दांत एक्स-रे में दिखाई ही नहीं दे रहा था. इससे समस्या की पहचान करना और भी मुश्किल हो गया.

एंडोस्कोपिक तकनीक बनी सहारा

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने एंडोस्कोपिक तकनीक का सहारा लिया. विशेष उपकरणों की मदद से सांस की नली के भीतर जांच की गई, तब जाकर पता चला कि नकली दांत का हिस्सा नली में फंस गया है. यदि इसे समय रहते नहीं निकाला जाता तो मरीज की जान को बड़ा खतरा हो सकता था.

ऐसे बची मरीज की जान

जानकारी का पता लगते ही डॉक्टरों ने बेहद सावधानी और सटीकता के साथ जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया. एंडोस्कोपिक तकनीक के जरिए सांस की नली में फंसे नकली दांत को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया. दांत निकलते ही मरीज की सांस सामान्य होने लगी और ऑक्सीजन स्तर में भी तेजी से सुधार दर्ज किया गया.

डॉक्टरों के अनुसार, सांस नली में किसी भी बाहरी वस्तु का फंसना बेहद खतरनाक स्थिति होती है. ऐसे मामलों में कुछ मिनटों की देरी भी गंभीर परिणाम दे सकती है. यही वजह रही कि डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए जांच और उपचार की पूरी प्रक्रिया पूरी की.

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