चीतों का तीसरा घर बना वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, सीएम मोहन यादव ने रिलीज किए 2 चीते

MP News: मुख्‍यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को सगार जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को छोड़ा. इन दोनों को व्‍योम और नीरा नाम दिया गया.
CM Mohan Yadav released cheetahs.

सीएम मोहन यादव ने छोड़े चीते

MP News: मध्‍य प्रदेश के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व को अब दो नए चीते मिल गए हैं. मुख्‍यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को सगार जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को छोड़ा. इन दोनों को व्‍योम और नीरा नाम दिया गया. दोनों चीतों को कूनों नेशनल पार्क से नौरादेही लाया गया है.

इन चीतों के लिए मुहली रेंज में 5 बोमा तैयार किए गए हैं. टाइगर रिजर्व के करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों को सुरक्षित रखने और उनकी निगरानी का इंतजाम किया गया है. रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में करीब 100 साल बाद फिर चीते लौटे हैं.

मध्‍य प्रदेश में सबसे ज्यादा टाइगर – सीएम मोहन यादव

चीतों को छोड़ने पर मुख्‍यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा गिद्ध कहीं पाए जाते हैं तो मध्‍य प्रदेश में ही हैं. उन्‍हाेंने कहा कि हमारे लिए ये सौभाग्य की बात है. देश में टाइगर सबसे ज्यादा किसी राज्य के भीतर है तो मध्‍य प्रदेश में ही है. सीएम ने कहा कि ऐसे ही चंबल में घड़‍ियाल, मां नर्मदा की कथा और मां नर्मदा का महत्व तो सबको मालूम ही है.

सीएम ने कहा कि नर्मदा जी में मगर छोड़ने का काम अगर किसी ने किया तो हमारी सरकार के माध्‍यम से ही हुआ है. मगर से डर जरूर लगता होगा, लेकिन मगर तो मां नर्मदा का वाहन है. उन्‍होंने कहा कि मैं अपनी ओर से आज दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीते छोड़ रहा हूं, लेकिन अगले महीने फिर दो चीते लेकर आएंगे. ये चारों मिलकर अपना परिवार बढ़ाएंगे. यह आबाद करेंगे. नए प्रकार के नए दौर से निकलेंगे.

वन्‍य प्राणी संरक्षण सप्‍ताह का समापन

सागर जिले के रहली में ‘वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह’ का समापन समारोह आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव भी शामिल हुए. इस मौके पर सीएम यादव ने ‘गिद्ध संख्या आकलन-2026’ रिपोर्ट, ‘बाघिन दीदी’ पोस्टर एवं ‘वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’ के बुंदेली भाषा में तैयार पोस्टर का विमोचन किया. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी ने ईको विकास समितियों को चेक वितरित किए तथा वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वनकर्मियों को सम्मानित किया.

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