Damoh: शिक्षा विभाग की बिडम्बना, जबलपुर हाई कोर्ट में मामला, फिर भी आरोपी शिक्षक को बना दिया संकुल प्राचार्य
दमोह: आरोपी टीचर को प्रिंसिपल बनाया गया
Damoh News: मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में पदस्थापना को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, दमोह जिले के तेंदूखेड़ा विकासखंड अंतर्गत सैलवाड़ा हायर सेकंडरी स्कूल से साल 2023 में कक्षा 10वीं का पेपर लीक होने के प्रकरण में आरोपी शिक्षक केएल चौकसे को अब तारादेही हायर सेकंडरी स्कूल का प्राचार्य एवं संकुल प्राचार्य बनाए जाने की जानकारी सामने आई है. खास बात यह है कि इसी पदस्थापना से जुड़े मामले में जबलपुर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी और कोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी दमोह को निर्देशित किया था.
FIR की जानकारी छिपाने का आरोप
न्यायालय के आदेश की व्याख्या दमोह जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया ने कुछ इस प्रकार से कि पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया. प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी शिक्षक केएल चौकसे द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका में स्वयं को तारादेही हाई स्कूल में वरिष्ठ शिक्षक बताते हुए यह दावा किया गया था कि शिक्षा विभाग ने उनसे जूनियर शिक्षक को संकुल प्राचार्य का दायित्व सौंप रखा है, जबकि चौंकाने वाली बात तो ये है कि याचिका में तेंदूखेड़ा थाने में आरोपी शिक्षक के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण की जानकारी का उल्लेख तक नहीं किया गया.
DEO को दिया 60 दिनों का समय
उक्त मामला सामने आने के बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने संबंधित याचिका पर दिनांक 14 अगस्त 2026 को सुनवाई करते हुए दमोह जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया को आदेशित किया कि 60 दिनों की मोहलत देते हुए निर्णय लेने को कहा साथ ही यह भी कहा कि संबंधित परिस्थितियों में ऐसा क्यों हुआ और याचिका क्रमांक WP-31972-2026 में उठाए गए बिंदुओं पर विभाग विचार करे.
अब इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है, कि जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश में बात स्पष्ट रूप से है कि 6 बिंदुओं पर विचार पर सक्षम अधिकारी निर्णय ले.लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने न्यायालय के विचारों को दरकिनार कर सीधे आदेश क्रमांक/स्था.01/न्या.आदेश/2026/6055 जारी कर दिया.
इस आदेश के जरिए आरोपी शिक्षक के.एल. चौकसे को तारादेही हायर सेकंडरी स्कूल का प्राचार्य और संकुल प्राचार्य बना दिया गया. यानि जिस पद को लेकर हाईकोर्ट में विवाद चल रहा था. उसी विवाद के बीच संबंधित शिक्षक को संकुल प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई.
420 समेत गंभीर धाराओं में दर्ज है अपराध
के.एल. चौकसे जोकि पूर्व में पतलौनी हायर सेकंडरी स्कूल के प्राचार्य और सीएम राइज तेंदूखेड़ा के प्रभारी प्राचार्य पद पर रहा हैं. मौजूदा पद पर होते हुए का नाम वर्ष 2023 के सैलवाड़ा पेपर लीक प्रकरण से जुड़ा है. तेंदूखेड़ा थाने में FIR क्रमांक 121/2023, दिनांक 20 मार्च 2023 को IPC की धारा 420, 120-B, मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम की धारा 3(A)/4, परीक्षा अधिनियम 1982 की धारा 3/4 तथा IT एक्ट की धारा 66 के तहत अपराध दर्ज किया गया था.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, सैलवाड़ा स्थित शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल से कक्षा 10वीं की परीक्षा का प्रश्न-पत्र व्हाट्सऐप के माध्यम से लीक किए जाने का मामला सामने आया था. जांच में मोबाइल और व्हाट्सऐप चैट से संबंधित साक्ष्यों का उल्लेख भी अभियोजन पक्ष की ओर से किया गया है. हालांकि, आरोपी की ओर से अग्रिम जमानत आवेदन में इन आरोपों से इनकार करते हुए स्वयं को निर्दोष बताया गया था. बचाव पक्ष का कहना था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और वह उस स्कूल में पदस्थ नहीं था, जहां से प्रश्न-पत्र लीक होने का आरोप है.
अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. चर्चा तो ये भी है कि डीईओ सत्यम चौरसिया और आरोपी शिक्षक केएल चौकसे के बीच काफी हद तक नजदीकियां है,यदि संपर्क सूत्र मजबूत नहीं होता तो हाई कोर्ट जबलपुर के विचारों की अवेहलना थोड़ी न करते डीईओ साहब.?
जब संबंधित शिक्षक की पदस्थापना को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए सक्षम अधिकारी को निर्णय लेने और बिंदुओं पर विचार करने के लिए आदेशित किया है.लेकिन बिना सम्बंधित शिक्षक की सर्विस रिकॉर्ड को खंगाले सीधे तौर पर आरोपी शिक्षक को प्राचार्य और संकुल प्राचार्य का महत्वपूर्ण दायित्व कैसे सौंप दिया गया.?
क्या विभाग को थी क्रिमिनल केस की जानकारी
क्या जिला शिक्षा अधिकारी ने एक बार भी BEO कार्यालय से जबाब लेना उचित नहीं समझा, जबकि FIR दर्ज कराने वाले अधिकारी और कोई नहीं तत्कालीन BEO बी. के.डोंगरे थे.? यदि मामले की जानकारी थी,तो पदस्थापना का आदेश जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि जानकारी नहीं थी, तो क्या पदस्थापना से पहले संबंधित शिक्षक के सेवा रिकॉर्ड और आपराधिक प्रकरणों का सत्यापन किया गया था?
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फिलहाल पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया के आदेश ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. वहीं इस पूरे मामले को लेकर जब तेंदूखेड़ा विकासखंड अधिकारी जुगल किशोर शर्मा से बात की तो उन्होंने साफ कह दिया कि आदेश डीईओ साहब ने किया है, मुझसे इस विषय को लेकर कोई जानकारी नहीं मांगी गई.