Ujjain: दिवाली पर फुलझड़ियों से हुई बाबा महाकाल की भस्म आरती, अन्नकूट का लगा महाभोग
बाबा महाकाल मंदिर
Mahakal Diwali Celebration: मध्य प्रदेश के उज्जैन में विराजमान विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली का पावन पर्व आज अपनी विशिष्ट और अनूठी परंपराओं के साथ मनाया गया है. देशभर में जहां अमावस्या के दिन दीपोत्सव मनाया जाएगा, वहीं बाबा महाकाल के दरबार में चतुर्दशी की भस्म आरती से ही दीपवाली पर्व की शुरूआत हो गई है.
बाबा महाकाल के दरबार में मौजूद पुजारी ने बताया कि रूप चतुर्दशी के शुभ अवसर पर रात के तड़के 4 बजे ही मंदिर के पट खुल गए और पूरे मंदिर में महाकाल के जयकारों से गूंज उठा. पट खुलने के बाद भगवान महाकाल का विशेष अभ्यंग स्नान कराया. परंपरा के मुताबिक स्नान से पूर्व बाबा महाकाल को तेल से मालिश की गई. बाद में पुजारी परिवार की महिलाओं ने केसर, चंदन, इत्र, खस और सफेद तिल से तैयार किए गए उबटन बाबा महाकाल को लगाया.
फुलझड़ियों से आरती की परंपरा
बाबा महाकाल का गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से स्नान के बाद सोने-चांदी के आभूषण और दिव्य वस्त्रों से मनोहारी राजसी श्रृंगार किया गया. मंदिर पुजारी ने बताया कि महाकाल मंदिर में दीपावली के शुभ अवसर पर सबसे अनूठी परंपरा फुलझड़ियों से होने वाली आरती है. तड़के की भस्म आरती से लेकर रात्रि के समय होने वाली शयन आरती तक, दिनभर की सभी पांच आरतियों में पुजारी गर्भगृह में फुलझड़ियां जलाकर बाबा महाकाल की आरती करते हैं.
अन्नकूट की परंपरागत परंपरा
दीपावली पर दीपों और आतिशबाजी की रोशनी से बाबा महाकाल का दरबार जगमगा उठता है. दीपावली के इस खास मौके पर भगवान महाकाल को पारंपरिक पकवानों का महाभोग लगाया गया. महाकाल को लगने वाले इस अन्नकूट के विशेष भोग में गुजिया, पपड़ी, शकरपारे, खुरमे, खीर-पूड़ी के साथ ही मौसमी सब्जियां, दाल-चावन, और फल शामिल होते हैं.
बाबा महाकाल का गर्म पानी से स्नान
परंपरा के अनुसार, रूप चौदस (कार्तिक चौदस) से बाबा महाकाल को ठंड के आने का संकेत मानते हुए गर्म जल से स्नान कराया जाता है और इसी दिन से गर्म पानी से बाबा के स्नान की परंपरा शुरू हो जाती है. गर्म पानी का स्नान कराने की परंपरा और ये परंपरा इसी क्रम में निरंतर महाशिवरात्रि तक चलेगा.



