कैंची धाम का स्थापना दिवस, भोपाल से जुड़ी नीम करोली बाबा की कहानी, जानें दिलचस्प किस्से
कैंची धाम का स्थापना दिवस आज
Neem Karoli Baba Bhopal Connection Story: 15 जून 2026 को उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध ‘कैंची धाम’ का स्थापना दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस पर्व में शामिल होने आ रहे हैं. हर साल की तरह इस साल भी कैंची धाम का स्थापना दिवस मनाने के लिए लोग बहुत उत्साहित नजर आ रहे हैं. इस खास मौके पर चारों दिशाओं से श्रद्धालु बाबा नीम करोली महाराज के दर्शन और आशीर्वाद के लिए कैंची धाम पहुंच रहे हैं. इस बार यह स्थापना दिवस और भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसके अगले ही दिन यानी 16 जून को ‘बड़ा मंगल’ का संयोग बन रहा है. इस वजह से भक्तों में और भी ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है.
आपको बता दें कि नीम करोली बाबा को 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध संतों में गिना जाता है. आज भी देश से लेकर विदेशों तक उनकी ख्याति चारों तरफ फैली हुई है. नीम करोली बाबा के लाखों-करोड़ों भक्त उन्हें भगवान हनुमान का अवतार मानते हैं और बड़ी ही श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं.
कैंची धाम की स्थापना कब हुई थी?
कैंची धाम आश्रम की शुरुआत 15 जून 1964 को हुई थी. इसके पीछे एक रोचक कहानी है. बाबा नीम करोली महाराज पहली बार 1961 में इस सुंदर और शांत जगह पर आए थे. उन्हें यह जगह इतनी पसंद आई कि उन्होंने यहां एक आश्रम बनाने का फैसला किया. इस काम में उनके भक्त और दोस्त पूर्णानंद जी ने उनकी मदद की. हर साल 15 जून को इस आश्रम का जन्मदिन मनाया जाता है. इस खास मौके पर यहां एक बहुत बड़ा मेला लगता है और भंडारा कराया जाता है. इस दिन देश-विदेश से लाखों लोग बाबा का आशीर्वाद लेने और प्रसाद खाने यहां आते हैं.
भंडारे से अनोखी मान्यता जुड़ी है
कैंची धाम के स्थापना दिवस पर होने वाला महाभंडारा बहुत फेमस है. भक्तों का मानना है कि इस भंडारे में कभी भी प्रसाद कम नहीं पड़ता. यहां चाहे जितने भी लोग आ जाएं सबको प्रसाद जरूर मिलता है. इस भंडारे में मिलने वाला मालपुआ का प्रसाद बहुत प्रसिद्ध है. दूर-दूर से आने वाले भक्त इसे बाबा का खास आशीर्वाद मानकर बहुत श्रद्धा से खाते हैं.
कौन थे विश्व प्रसिद्ध नीम करोली बाबा?
नीम करोली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था. उनके बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था. बहुत छोटी उम्र में ही उनका मन घर-परिवार और सांसारिक बातों से हट गया था और वे भगवान की भक्ति की तरफ खिंचे चले गए. बाबा ने अपनी पूरी जिंदगी लोगों की मदद करने, ईश्वर की भक्ति करने और समाज को सही रास्ता दिखाने में बिता दी.
नीम करोली बाबा का भोपाल से क्या नाता था?
नीम करोली बाबा का भोपाल से गहरा और पारिवारिक नाता था. उनके बेटे सरकारी नौकरी के सिलसिले में भोपाल में ही रहते थे, इसलिए साल 1950 से 1970 के बीच बाबा कई बार यहां आए. आज भी उनका परिवार भोपाल में रहता है और यहां सालों से बाबा का एक पवित्र अस्थि कलश भी सुरक्षित रखा हुआ है.