इस जिले में रक्षाबंधन के दिन नहीं, बल्कि एक दिन बाद मनाई जाती है राखी, जानिए 800 साल पुरानी परंपरा

Raksha Bandhan Unique Tradition: इस जिले में रक्षाबंधन पूर्णिमा के दिन नहीं, बल्कि उसके अगले दिन यानी प्रतिपदा को बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं. आइए जानते हैं कि आखिर भारत के इस जिले में एक दिन बाद रक्षाबंधन का त्योहार क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे की क्या वजह है.
Raksha Bandhan 2026

रक्षाबंधन 2026

800-Year-Old History: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा. इस खास दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र के लिए भगवान से कामना करती हैं. इस पावन पर्व पर पूरा घर खुशियों से भरा रहता है. हर साल इस त्यहार को हिंदू परिवार बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं. वहीं भारत का एक ऐसा स्थान या जिला भी है, जहां रक्षाबंधन का त्योहार तय दिन पर नहीं, बल्कि उसके एक दिन बाद मनाया जाता है.

इस जिले में रक्षाबंधन पूर्णिमा के दिन नहीं, बल्कि उसके अगले दिन यानी प्रतिपदा को बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं. आइए जानते हैं कि आखिर भारत के इस जिले में एक दिन बाद रक्षाबंधन का त्योहार क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे की क्या वजह है.

इस जिले में एक दिन बाद मनाया जाता है रक्षाबंधन

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन पूरे देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. लेकिन उत्तर प्रदेश का महोबा जिला देश का इकलौता ऐसा जिला है, जहां रक्षाबंधन के दिन बहने अपने भाइयों को राखी नहीं बांधती हैं, बल्कि उसके एक दिन बाद प्रतिपद तिथि को राखी बांधती हैं. इस परंपरा के पीछे एक बहुत ही रोचक कहानी और इसका विशेष महत्व है.

क्या है पौराणिक कथा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह घटना साल 1182 की है. उस समय बुंदेलखंड में उरई के राजा माहिल के भड़काने पर महोबा के राजा परमाल ने अपने दो सबसे बहादुर सेनापतियों आल्हा और ऊदल को राज्य से बाहर निकाल दिया था. इसका फायदा उठाकर राजा माहिल ने दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान को महोबा पर हमला करने के लिए बुला लिया. पृथ्वीराज चौहान ने अपनी विशाल सेना के साथ महोबा को चारों तरफ से घेर लिया और खुद सालट के जंगलों में डेरा डाल दिया. इसके बाद उन्होंने राजा परमाल के सामने एक शर्त रखी कि या तो वे उनकी गुलामी स्वीकार कर लें या फिर युद्ध के मैदान में उनका सामना करें.

पृथ्वीराज चौहान ने रखीं थी क्या शर्तें ?

पृथ्वीराज चौहान ने महोबा के राजा परमाल के सामने बहुत अपमानजनक शर्तें रखी थीं. उन्होंने कीमती पारस पत्थर, नौलखा हार, कालिंजर और ग्वालियर का किला और खजुराहो की बैठक की मांग की थी. इसके साथ ही वे अपने बेटे ताहर की शादी राजा परमाल की बेटी राजकुमारी चंद्रावल से कराना चाहते थे. जहां एक तरफ उरई के राजा माहिल ने इन शर्तों को मानने की सलाह दी, वहीं राजा परमाल की पत्नी रानी मल्हना, राजकुमार ब्रह्मा, रंजीत और दूसरी दरबारी इन शर्तों को सुनकर गुस्से से लाल हो गए.

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कीरत सागर तट पर भुजरियों का ऐतिहासिक युद्ध

रक्षाबंधन के दिन आल्हा, ऊदल और उनके साथियों ने जोगियों के वेश में आकर पृथ्वीराज चौहान की सेना को युद्ध में खदेड़ दिया था. इस वजय के अगले दिन बहनों ने कीरत सागर तालाब में कजलियों का विसर्जन किया और भाइयों को राखी बांधी. ऐतिहासिक जीत के कारण आज भी महोबा और पूरे बुंदेलखंड में रक्षाबंधन का पर्व अगले दिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है.

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