ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, 'जनप्रतिनिधियों के बच्चों को इस रास्ते से नहीं गुजरना पड़ता. वो तो बड़े शहरों और विदेशों में पढ़ते हैं. लेकिन हमारे बच्चों का भविष्य इसी कीचड़ में फंस गया है.'