Ram Mandir Donation: सुरक्षा पर 10 करोड़ खर्च के बावजूद चढ़ावा चोरी, अब तक 125 कर्मचारियों से पूछताछ, जांच के घेरे में कई बड़े नाम
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला
Big Names in Chanda Chori Investigation: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच अब तेज हो गई है. विशेष जांच दल (Special Investigation Team) की जांच में अब सिर्फ आरोपी टिन्नू यादव ही नहीं, बल्कि कई कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है. जिसकी जांच एसआईटी करेगी. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जब मंदिर की सुरक्षा पर 11 महीनों में 10 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए, तो फिर इतनी बड़ी चोरी कैसे हुई. फिलहाल, इस चोरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने कई नए सवालों को जन्म दे दिया है. जब चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया, तो सामान्य सा लगा, लेकिन जब जांच की गई तो पचा चला कि यह तो 200 करोड़ रुपए से ज्यादा का है. मामला एक तो राम मंदिर और दूसरा 200 करोड़ रुपए से जुड़े होने की वजह से जांच का जिम्मा SIT को दे दिया गया. SIT की जांच में सबसे बड़ा नाम निकलकर आया. वह है टिन्नू यादव का. टिन्नू यादव के पास कई करोड़ की प्रॉपर्टी है. जिसकी जांच की जा रही है.
SIT ने बढ़ाया जांच का दायरा
इसके अलावा एसआईटी की टीम उन सभी लोगों की भूमिका की भी जांच करने में जुटी है. जो मंदिर की सुरक्षा, निगरानी और प्रवेश व्यवस्था से सीधे जुडे़ हैं. शुरुआती जांच में कुछ ही लोगों की भूमिका सामने आई, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है. वैसे-वैसे लोगों की भी संख्या बढ़ती ही जा रही है.
17 सालों से एक ही जगह पर जमा है RMO
टिन्नू यादव के बाद से जांच की सुई रेडियो मेंटिनेंस ऑफिसर (RMO) पर आकर रुक गई है. RMO के पास मंदिर परिसर के सीसीटीवी की जिम्मेदारी थी. RMO करीब 17 सालों से मंदिर परिसर से जुड़ा बताया जा रहा है. फिलहाल, एसआईटी की टीम ने सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली, रिकॉर्डिंग सिस्टम, बैकअप व्यवस्था, डेटा संरक्षण समेत सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई है. अब तक करीब 125 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है.
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सुरक्षा पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब सुरक्षा व्यवस्था पर करोड़ों रुपए खर्च हुए, तो इसके बावजूद भी इतनी बड़ी चोरी कैसे संभव है. इस घटना के बाद से मंदिर प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे. जानकारी के अनुसार, पिछले 11 महीनों में सिर्फ सुरक्षा पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. इसके बावजूद चोरी की घटना ने कई सवालों को जन्म दे दिया है. फिलहाल, एसआईटी की टीम जांच में जुटी है.