उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत इस राज्य में अकेले चुनाव लड़ेगी BSP, जानें इसके पीछे की रणनीति
मायावती (फाइल फोटो)
Mayawati Alliance Stance Clarified: बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने तीन प्रदेशों में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. मायावती ने यह फैसला पार्टी की बैठक में समीक्षा करने के बाद लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारा पूरा फोकस आम विधानसभा चुनाव को देखते हुए कर्मठ व ईमानदार लोगों को उम्मीदवार बनाने पर रहेगा. यानी इस बार बसपा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के साथ ही पंजाब में भी अकेले चुनाव लड़ेगी.
मायावती ने आगामी 9 अक्टूबर को बीएसपी के जन्मदाता व संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि को सफल बनाने का आह्वान किया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 15 जनवरी 2027 को ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के मौके पर बीएसपी के आर्थिक सहयोग को पिछली बार से ज्यादा बेहतर करना होगा. यह पार्टी के कारवां व मूवमेंट को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है.
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— Mayawati (@Mayawati) August 25, 2026
पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की तैयारी में जुटी BSP
मायावती ने बताया कि आज पंजाब में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने तथा पार्टी संगठन के कार्यों, वरिष्ठ एवं जिम्मेदार लोगों के साथ लंबी बैठक चली, जिसमें निर्णय लिया गया कि पंजाब के साथ ही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी. इसके लिए कर्मठ व ईमानदार लोगों को उम्मीदवार बनाने में बल दिया जाए, ताकि विधानसभा चुनाव में अच्छा परिणाम आ सके.
पंजाब की जनता AAP, BJP-कांग्रेस तीनों से दुखीः BSP
उन्होंने आगे कहा पंजाब के लोगों को बीएसपी के माध्यम से गरीबी, बेरोजगारी आदि से मुक्त कराकर उन्हें आत्म-सम्मान दिया जाएगा. क्योंकि पंजाब के लोग चाहे सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी हो या भाजपा-कांग्रेस इन पार्टियों के जनविरोधी रवैयों से लोग काफी दुखी और त्रस्त हैं.
9 अक्टूबर को मनाई जाएगी कांशीराम की पुण्यतिथि
पिछली बार बीएसपी की ऑल-इंडिया बैठक में पार्टी संगठन को पोलिंग बूथ स्तर तक तैयार करने व जनाधार को आगे बढ़ाने के लिए 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर हर साल की तरह इस साल भी कार्यक्रम रखा गया है. जिसमें पार्टी से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों संबंधित फीडबैक के बाद कमियों को रखा जाएगा. इन कमियों पर समय रहते काम किया जाएगा, ताकि पार्टी अपने मंसूबे पर सफल हो सके.
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क्या है BSP की रणनीति?
मायावती ने कहा कि तीनों राज्यों में पार्टी बिना किसी गठबंधन के चुनाव नहीं लड़ेगी. इसकी सबसे बड़ी खास वजह है कि चुनावी गठबंधन से बीएसपी को सीट व वोट प्रतिशत दोनों में होने वाले घाटे से पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर जाता है. इसलिए पार्टी ने इस बार तय किया है कि किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी. विधानसभा चुनाव में पूरे दमखम के साथ अच्छे परिणाम लाने की तैयारी में पार्टी जुट गई है.