‘हूजूर, जिंदा है वो…’, भरी अदालत में खुली दारोगा की पोल, आरोपी को बताया था मृत, कोर्ट ने लताड़ा
भरी अदालत में खुली दारोगा की पोल, आरोपी को बताया था मृत
Sub-Inspector Exposed In Court: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दारोगा ने एक आरोपी को मृत घोषित कर उसका मृत्यु प्रमाण पत्र दाखिल कर दिया. लेकिन कुछ ही समय बाद दरोगा की पोल खुल गई. लखनऊ एसीपी ज्ञानेंद्र सिंह ने जब इस मामले की जांच की तो पता चला कि आरोपी ने ठगी करने के लिए अपना नाम बदल रखा था. हाईकोर्ट के एसीजेएम बलवंत कुमार भारती ने दारोगा अशोक कुमार यादव को न्यायालय में तलब किया है. जानें क्या है पूरा मामला?
दरअसल, जालसाजी के एक आरोपी को लखनऊ में बीकेटी थाने के दारोगा ने मृत घोषित कर दिया. जबकि आरोपी जिंदा था. बीकेटी थाने में ही जालसाज अभियुक्त रवि प्रकाश सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना समेत कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ था. दारोगा के मृत घोषित करने पर कोर्ट ने उन्हें नोटिस भेजा है.
कोर्ट ने दिया नोटिस
कोर्ट की नोटिस में लिखा, अभियुक्त रवि प्रकाश सिंह के खिलाफ धारा 82 का आदेश 30 अगस्त 2025 को एवं धारा 83 द0प्र0स0 का आदेश 6 जनवरी 2026 को जारी किया गया था. जिसमें बताया गया कि रवि प्रकाश सिंह पुत्र रामपाल सिंह की मृत्यु 17 अप्रैल 2026 को हो चुकी है. उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी न्यायालय में पेश किया गया है.
जालसाजी के लिए बदला था नाम
जांच में पाया गया कि अभियुक्त जालसाज का आरोपी है, जो अपना सही नाम छिपाकर फर्जी तरीके से धोखाधड़ी को अंजाम देता है. फर्जी रवि प्रकाश सिंह का असली नाम राम लखन मिश्रा है. यह जानकारी उसके सही दस्तावेजों से पाई गई. जांच में यह भी पाया गया कि वह रवि प्रकाश सिंह बनकर धोखाधड़ी को अंजाम देता था. यह जांच एसटीएफ के निरीक्षक हेमंत भूषण सिंह ने की.
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कोर्ट ने जताई नाराजगी
मामला चाहे जो भी हो, लेकिन दारोगा के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है और नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा दारोगा के द्वारा दी गई रिपोर्ट एवं एसीपी बक्शी का तालाब एवं एसटीएफ के निरीक्षण हेमंत भूषण सिंह की रिपोर्ट में गंभीर विरोधाभास है. इसके बाद कोर्ट ने दारोगा के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के लिए उच्चतम न्यायालय को पत्र भेजने की बात कही है.