स्वामी प्रसाद मौर्य की गठबंधन में No ENTRY, पल्लवी पटेल को बताया बहन, असल में क्या है अखिलेश की रणनीति
यूपी चुनाव से पहले क्या कर रहे अखिलेश?
उत्तर प्रदेश में अगले कुछ महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इन चुनावों से पहले सियासी समीकरणों को बनाने की कवायद तेज हो चली है. तो वहीं अब तक इंडिया गठबंधन की स्थिति भी साफ नहीं हो पाई है. दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर बातचीत चल रही है. इन सब के बीच अब स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर भी समाजवादी पार्टी सख्त नजर आ रही है. दूसरी तरफ अखिलेश यादव और पल्लवी पटेल को लेकर अलग ही गणित बैठाया जा रहा है. यही वजह है कि हर कोई हैरान है कि असल में चुनाव को लेकर अखिलेश किस रणनीति पर काम कर रहे हैं.
एक तरफ अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को गठबंधन में शामिल करने से इनकार कर दिया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता उनसे लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. वहीं, अखिलेश यादव ने पल्लवी पटेल को बहन बताकर पुराने रिश्तों को सुधारने के संकेत दिए हैं. कुल मिलाकर पुराने रुठों को मनाने की कवायद तेज होती जा रही है.
अखिलेश और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच तेज हो रही तल्खी
दरअसल, स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की मदद से राहुल गांधी से मुलाकात की थी. इसके बाद वह आजम खान से मिलने रामपुर जेल भी पहुंचे. जब इस बारे में अखिलेश यादव से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य सपा गठबंधन का हिस्सा नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि बेवजह इस मुद्दे पर चर्चा करने की जरूरत नहीं है. स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम गठबंधन की सीटों की गिनती में भी शामिल नहीं होगा.
अखिलेश के इस बयान पर मौर्य ने पलटवार किया. उन्होंने बिना नाम लिए सपा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता खुद अपनी बातों को लेकर स्पष्ट नहीं है, वह पार्टी और प्रदेश को क्या दिशा देगा.
स्वामी से दूरी पर कांग्रेस का अलग रुख
स्वामी प्रसाद मौर्य भले ही इंडिया गठबंधन में शामिल होने के लिए आतुर नजर आ रहे हैं. लेकिन गठबंधन की अहम सहयोगी समाजवादी पार्टी इसके खिलाफ है. अखिलेश के साफ इनकार करने के बाद यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात हो रही है.
मुलाकात पर उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई में साथ रहे लोगों से मिलना जारी रहेगा. किसी की नाराजगी के कारण वह अपने पुराने साथियों से मिलना बंद नहीं करेंगे. यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने भी कहा कि इंडिया गठबंधन में किसे शामिल करना है, इसका फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा. कुल मिलाकर कांग्रेस का कहना यह है कि अखिलेश ये फैसला नहीं करेंगे कि हम किसके साथ रहें और किसके साथ नहीं.
पल्लवी पटेल के साथ रिश्ते सुधार रहे अखिलेश
दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने पल्लवी पटेल को बहन बताकर राजनीतिक समीकरणों को नया संकेत दिया है. दोनों नेताओं के बीच 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान मतभेद सामने आए थे. पल्लवी पटेल की क्रॉस वोटिंग के बाद सपा और उनके रिश्तों में दूरी बढ़ गई थी. हालांकि, हाल के दिनों में पल्लवी की तरफ से अखिलेश के साथ दोबारा तालमेल बनाने की इच्छा जताई गई थी. इससे माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी अपने पुराने रुठों को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है.
अब अखिलेश ने केशव प्रसाद मौर्य के चुनाव जीतने के दावे पर जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें पहले अपना चुनाव क्षेत्र तय करना चाहिए, क्योंकि पिछली बार उन्हें हमारी बहन ने ही हराया था. उनका इशारा पल्लवी पटेल की ओर था, जिन्होंने सिराथू सीट से केशव प्रसाद मौर्य को हराया था. इससे माना जा रहा है कि एक बार फिर केशव प्रसाद मौर्य के सामने पल्लवी पटेल को ही मैदान में उतारा जा सकता है.
सीटों के बंटवारे से बढ़ सकती है मुश्किल
कांग्रेस की ओर से यूपी की करीब 200 सीटों पर दावेदारी की चर्चा है. न सिर्फ चर्चा है बल्कि राजधानी लखनऊ में 200 सीटों के दावे को लेकर बैनर-पोस्टर भी लगाए गए थे. दूसरी तरफ सपा चाहती है कि कांग्रेस पहले अपनी मजबूत सीटों और उम्मीदवारों की जानकारी दे. इसके बाद ही आगे की बात की जाए. तो वहीं गठबंधन में स्वामी प्रसाद मौर्य को शामिल करने को लेकर भी दोनों के बीच पेंच फंस सकता है.
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, पल्लवी पटेल के साथ नजदीकी बढ़ाकर अखिलेश कुर्मी समाज को साधने की कोशिश की है. इसके साथ ही पिछड़े वर्ग के बीच अपना सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. फिलहाल तस्वीर यह है कि अखिलेश पल्लवी के लिए दोबारा दरवाजे खोलते दिख रहे हैं, लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर उनका रुख सख्त बना हुआ है.
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