Bhopal: भोपाल में वेस्‍टर्न बायपास के विरोध में किसान, 5 गांव डूबने की आशंका, MPRDC नहीं कर रहा DPR सार्वजनिक

Bhopal: गांव के रहवासियों ने कलेक्टर और एमपीआरडीसी के एमडी से मांग की है कि इस रोड के प्रस्तावित डीपीआर को सार्वजनिक किया जाए.
Western Bypass in Bhopal

भोपाल में वेस्‍टर्न बाईपास

Bhopal News: भोपाल में एमपीआरडीसी के प्रस्तावित भोपाल वेस्टर्न बायपास से सटे गांव के करीब पांच हजार रहवासी नाराज हैं. क्योंकि बायपास बनने से इनके गांव बारिश के दौरान डूब जाएंगे. इस संबंध में इन गांव के रहवासियों ने कलेक्टर और एमपीआरडीसी के एमडी से मांग की है कि इस रोड के प्रस्तावित डीपीआर को सार्वजनिक किया जाए और डूब से बचाने के ठोस प्रबंध हों. ग्रामीणों का कहना है कि जहां से रोड बनाने के लिए पत्थर लगाए गए हैं, उससे ये गांव डूब जाएंगे. क्योंकि रोड की ऊंचाई चार-पांच फिट ऊपर पर होगी, ये गांव तराई में आ जाएंगे. ज्यादातर ग्रामीणों के पास कोई दूसरी जमीन नहीं है, जिससे वे दूसरी जगह बस सकें.

रोड के बनने से सात गांव होंगे प्रभावित

बायपास 35.61 किलोमीटर का है, नर्मदापुरम रोड 11 मील से फंदा के पास देवास-भोपाल मार्ग में जुड़ेगा. इस रोड के बनने से करीब सात गांव प्रभावित होंगे, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत खोकरिया गांव, टीलाखेड़ी, हथाईखेड़ी, बारवाखेड़ी और कुलाश गांव को है. खोकरिया गांव के सौ मीटर से ही यह बायपास गुजर रहा है. जबकि गांव के सामने काफी जगह खाली पड़ी है, लेकिन खास लोगों की जमीन बचाने के लिए बायपास को इस गांव के पास से ही निकाला जा रहा है.

आंदोलन पर उतारू किसान

किसान रोड के बनने के दौरान मुआवजा मिलने को लेकर परेशान नहीं है. बल्कि उनकी चिंता रोड बनने से घरों में पानी भरने से है. किसानों का कहना है कि अगर आधा किलोमीटर भोपाल की तरफ बढ़ाकर बायपास बनता है तो गांव में जलभराव कम होगा.

भोज वेटलैंड को होगा बड़ा नुकसान

एनवायरमेंटल एक्सपर्ट का कहना है कि वेस्टर्न बायपास बनने से भोज वेटलैंड को बहुत ज्यादा नुकसान होगा. बड़े तालाब का कैचमेंट क्षेत्र एवं बाघों के भ्रमण का क्षेत्र प्रभावित होगा. वन एवं पर्यावरण को भी इसके बनने से क्षति पहुंचेगी. इसकी उपयोगिता भी अभी बहुत ज्यादा नहीं है. इस संबंध में हमने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को पत्र भी लिखा है.

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