जिंदगी बचाने की जगह, मौत को न्योता! मऊगंज में उप स्वास्थ्य केंद्र निर्माण में धांधली, अधिकारियों ने साधी चुप्पी

MP News: हनुमना जनपद की ग्राम पंचायत गाड़ा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य चल रहा है. लेकिन इस निर्माण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार द्वारा खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है
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मऊगंज में उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण में धांधली

MP News: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से सामने आई तस्वीरें सिर्फ लापरवाही की कहानी नहीं, बल्कि जनता की जिंदगी के साथ हो रहे खुले खिलवाड़ की गवाही दे रही हैं. जहां लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी थीं, वहां भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा किया जा रहा एक खतरनाक ढांचा नजर आ रहा है.

क्या है पूरा मामला?

हनुमना जनपद की ग्राम पंचायत गाड़ा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य चल रहा है. लेकिन इस निर्माण में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार द्वारा खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं.

घटिया निर्माण सामग्री का आरोप

निर्माण कार्य में तय मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. जहां स्टीमेट के अनुसार फ्लाई ऐश ईंटों का उपयोग होना था, वहां कमजोर मिट्टी की ईंटें लगाई जा रही हैं. रेत की जगह डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है और सरिया भी निर्धारित मानकों से कम मात्र 8, 10 और 12 एमएम का लगाया जा रहा है. इतना ही नहीं, बीम और कॉलम में वाइब्रेटर का उपयोग नहीं किया जा रहा, जिससे निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं. दीवारें भी मात्र 4 इंच मोटी बनाई जा रही हैं, जो किसी भी मानक के अनुसार बेहद कमजोर मानी जाती हैं.

भ्रष्टाचार छुपाने की कोशिश?

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण की सच्चाई छुपाने के लिए छत डालने से पहले ही जल्दबाजी में प्लास्टर किया जा रहा है, ताकि घटिया काम किसी की नजर में न आए. मामले की शिकायत कमिश्नर तक पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. इससे ग्रामीणों में आक्रोश और भय दोनों बढ़ता जा रहा है.

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ग्रामीणों में गुस्सा और डर

गांव के लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है, क्या यह उप स्वास्थ्य केंद्र इलाज की उम्मीद बनेगा या किसी बड़े हादसे का कारण? जिस भवन में लोगों की जिंदगी बचाने की उम्मीद होगी, अगर वही असुरक्षित हुआ, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं.

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर है. आखिर क्यों अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई? क्या इस भ्रष्टाचार को संरक्षण मिल रहा है?

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