दमोह से भोपाल तक फैला फर्जी BPL कार्ड का जाल! दो के खिलाफ नोटिस जारी, FIR दर्ज, जांच जारी
दमोह बीपीएल कार्ड फर्जीवाड़ा : आरोपी धन्नू
MP News: मध्य प्रदेश के दमोह जिले से शुरू हुये बीपीएल फर्जीवाड़े की जड़ें अब प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच चुकी हैं. हाल ही में भोपाल स्थित किसी अनुविभाग क्षेत्र में 100 से ज्यादा फर्जी बीपीएल कार्ड पकड़े गए थे. जो या तो सरकारी कर्मचारी थे, या बीपीएल कार्ड के लिए अपात्र थे. लेकिन सिस्टम में बैठे अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ ऐसी कि वो भी पात्र हो गये. अब तक पूरे मामले में दो कर्मचारियों को निलंबित कर एसडीएम सहित दो लोगों को नोटिस जारी किए गए है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक में भी करीब 1 हजार से ज्यादा फर्जी बीपीएल कार्ड बना दिए गए थे. मामला जैसे ही 18 सितंबर 2025 को प्रकाश में आया तो 29 सितंबर 2025 को स्थानीय सूत्र बताते हैं कि जनपद में चोरी का षड्यंत्र रचा दिया गया और जिन कूट रचित दस्तावेज की जांच होनी थी. चोरों ने सिर्फ उन्हीं बंडालो को हाथ लगाया और उन्हें साफ कर दिया. ऐसा जनपद सीईओ मनीष बागरी का कहना था कि रघवीर चौहान जो कि लिपिक है, उनके आवेदन में उल्लेख था कि मत्स्य विभाग के पट्टे और बीपीएल संबंधित दस्तावेजों के बस्ता गायब हुये हैं. 10 अप्रैल 2026 तक पुलिस उक्त चोरी का खुलासा करने में नाकाम रही.
फर्जीवाड़े मामले में जांच समिति गठित
बड़े खेल को उजागर करने के लिए तत्कालीन कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने राजस्व, कृषि और अन्य विभागों की एक टीम बनाई जो साल 2025 में हुये सैकड़ों कूट रचित आदेशों की जांच करेगी. जिसके बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. टीम ने करीब 6 महीने बाद मामले की जांच कर 6 मार्च 2026 को जांच प्रतिवेदन कलेक्टर शिकायत शाखा दमोह में जमा कर दिया. लेकिन इस जांच में क्या कुछ खुलासा हुआ इसे आज भी गोपनीय रखा गया है आखिर क्यों?

ब्लॉक स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की एक राय से सहजपुर निवासी धन्नु बल्द कुद्दू पाल पर कूट रचित दस्तावेज तैयार करने की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करवा दी गई. इसके साथ ही पुलिस ने आरोपी धन्नु पाल के कथन के आधार पर धनराज पाल को थाने आने के लिए कहा. धनराज के कथनों पर यशवंत घोसी को उठाकर मामले में आरोपी बना दिया गया. दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी हुई सूत्र बताते हैं कि पुलिस चार्ट सीट में करीब 7 नामों का जिक्र हैं.
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दरअसल, तेंदूखेड़ा तहसील न्यायालय से संदिग्ध बीपीएल कार्ड धारियों के राजस्व प्रकरण निकलवाए गए. जिसमें जनपद में पंजीकृत बीपीएल कार्डधारी को अपात्र बताया गया क्योंकि उक्त राजस्व प्रकरण को तहसीलदार तेंदूखेड़ा ने खारिज कर दिया था. फिर जनपद में फर्जी राजस्व प्रकरण क्रमांक 0828/बी -121/2023-24 के आधार पर वर्ष 2023-24 में पंजीकृत बीपीएल कार्ड की सूची में 404 नम्बर पर उसे पात्र पाया गया, जिसका बीपीएल क्रमांक 218 है. दबे राज खुलने से जनपद सीईओ हरकत में आए और आनन फानन में धन्नू के खिलाफ थाने पंहुचकर एफआईआर दर्ज करवाई. जबकि उक्त फर्जी राजस्व प्रकरण क्रमांक 0828 में अन्य दो लोग भी शामिल थे. राहुल पिता नब्बू पाल बीपीएल सूची क्रमांक 433 एवं टट्टु गौड़ पिता सोने लाल बीपीएल सूची क्रमांक 432 निवासी सहजपुर जिनके खिलाफ अपराध पंजीबद्ध नहीं करवाया गया.
पुलिस पर लगे सवालिया निशान
फर्जीवाड़े मामले में पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली लेकिन मामले की निष्पक्षता से जांच न करते हुए पुलिस राजनैतिक दबाव में जांच करना बताया जा रहा है. आरोपी धन्नू ने शपथ पत्र देकर आरोप लगाया है कि जांच में पुलिस ने उसके कथनों को तोड़-मरोड़कर लिखा है. 12 हजार रुपए लेकर फर्जी बीपीएल बनवाने वाले मुख्य संदिग्ध धनराज पाल का नाम हटा दिया है. गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करता हूं इसलिए मैंने तहसीलदार न्यायालय में आवेदन दिया था, जो निरस्त हो गया था. जिसके बाद मैं गांव के धनराज पिता संतोष पाल के साथ फिर से जनवरी 2024 को तहसील गया, लेकिन मुझसे दफ्तर के बाहर खड़ा रहने कहा गया.
धनराज तहसीलदार कार्यालय में बात करके बाहर आया और मुझे कहने लगा कि 12000 रुपये लग रहे हैं. गांव में भी सुना था कि पैसों की दम पर कार्ड बन रहे हैं. फिर परिवार में चर्चा करके मैं धनराज को बीपीएल कार्ड बनाने के लिए फरवरी 2024 को 12000 रुपये रु नगद दे दिए. धनराज ने पैसे तहसीलदार के बाबू को देना बताया था. जिसके करीब 15 से 20 दिन बाद मुझे बीपीएल कार्ड लेने जनपद ले गया जहां से जनपद के बाबूजी ने मुझे बीपीएल कार्ड दे दिया और प्राप्ति के हस्ताक्षर भी लिए थे. पुलिस पूछताछ में मैंने यही बात कही थी. यदि पुलिस ने कुछ और बात लिख ली हो तो मैं नहीं बता सकता. मामले की मुख्य कड़ी जनपद पंचायत में 2 साल के सेवा विस्तार लिपिक रघुवीर चौहान है, जिन्हें आज दिनांक तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई. जबकि फर्जी बीपीएल कार्ड बनाने में रघुवीर की मुख्य भूमिका थी एवं रघुवीर ही वो कड़ी है जो इस फर्जीवाड़े की गुत्थी को सुलझाने में एहम रोल अदा कर सकते हैं.
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जांच पर किया जा रहा संदेह
क्या पुलिस की मेहरबानी से बाबू फरार है? या फिर अन्य लोगों के नाम उजागर न हो सकें , उनके दबाव में बाबू में शहर छोड़ दिया. फिलहाल यह गुत्थी अभी सुलझी नहीं है. इस पूरे प्रकरण की विवेचना कर रहे संजय सिंह का कहना है कि जनपद पंचायत और तहसील को पत्र लिखकर अन्य दस्तावेजों की मांग की गई है, जैसे ही दस्तावेज प्राप्त होंगे आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं, सीईओ मनीष बागरी का कहना है कि एफआईआर करवाते समय ही सारे दस्तावेज पुलिस की उपलब्ध करवा दिए गए थे, कुछ दस्तावेज और मांगे गए है जो शीघ्र ही उपलब्ध करवा दिए जाएंगे. ऐसे में एक सवाल ये भी है कि जब दस्तावेज मौजूद थे तो फिर चोरी की FIR क्यों.?