‘आरक्षण तब तक नहीं खत्म किया जा सकता, जब तक…’, उमा भारती ने रिजर्वेशन को ‘तीसरी आजादी’ की जरूरत बताया
लोधी समाज सम्मेलन में उमा भारती ने जनसभा को संबोधित किया.
Uma Bharti on Resrvation: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में लोधी समाज का सम्मेलन आयोजित किया गया. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री ने उमा भारती ने जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने लोधी समाज और उसके योगदान को लेकर बात की. उन्होंने लोधी समाज के मुख्यमंत्री बनाने से लेकर आरक्षण कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.
‘2014 में भारत का मन आजाद हुआ‘
जनसभा को संबोधित करते हुए उमा भारती ने कहा कि हमको दो आजादी मिल चुकी है, तीसरी आजादी की लड़ाई हमको लड़नी है. उन्होंने कहा, ‘1857 में पहली लड़ाई का बिगुल राजा हिरदेशाह लोधी ने फूंका था. इसको नकार नहीं सकता. राजा हिरदेशाह का लड़ाई का वही तरीका था, जो शिवाजी महाराज का था. पीएम मोदी ने 2014 में जब शपथ ली, तभी अमेरिका के एक न्यूज पेपर में लेख लिखा गया. इसमें बताया गया कि भारत 1947 में आजाद हुआ. लेकिन 2014 में भारत का मन आजाद हुआ. मुगलों ने हमारे मंदिर तोड़े, मुगलों ने हमारे हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाया. अंग्रेजों ने हमारे समाज और बुद्धि को तोड़ा था. अंग्रेज तो चले गए थे, लेकिन कुछ लोगों ने हमारे देश को अंग्रेजों के हिसाब से चलाया. हमारे समाज का आधुनिकीकरण हो रहा है, लेकिन पश्चिमीकरण नहीं हो रहा है.’
‘तीसरी लड़ाई आर्थिक समानता का अधिकार है’
उमा भारती ने आगे कहा, ‘दो आजादी हमको मिल चुकी है. अब हमको तीसरी आजादी लेनी है. तीसरी आजादी आर्थिक विषमता से मुक्ति है. सरकारी स्कूल और प्राइवेट स्कूल, सरकारी अस्पताल और प्राइवेट अस्पताल दोनों जगह एक जैसी पढ़ाई होना और एक जैसा इलाज होना जरूरी है. कोरोना काल में हमने देखा कि लाखों गरीब लोग तपती हुई गर्मी में पैदल चले हैं. उसी कोरोना काल में अमीरों के कुत्ते हवाई जहाज में जा रहे थे. इससे हम देश को नहीं ठीक रख पाएंगे. देश को अगर ठीक रखना है तो हमको तीसरी लड़ाई लड़नी होगी, जो कि आर्थिक समानता का अधिकार है. इसमें कोई भी भेदभाव नहीं होना चाहिए. जब तक प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस और गरीब परिवारों के बच्चे एक स्कूल में नहीं पढ़ते तब तक आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता है.’
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