Panna: ‘श्मशान के मटके से छिड़कते हैं खदान में पानी’, हीरे की तमन्ना में लोग करते हैं टोने-टोटके
हीरे की खदानें
Panna/सौरभ साहू: बुंदेलखंड के पन्ना की धरती को ‘रत्नों की जननी’ कहा जाता है, लेकिन यहाँ की उथली खदानों में चमकते पत्थर को पाने की जद्दोजहद सिर्फ फावड़े और कुदाल तक सीमित नहीं है. यहाँ हीरा मिलने और न मिलने के पीछे आस्था, अंधविश्वास और डरावने टोटकों का एक ऐसा मायाजाल बुना गया है, जिसे सुनकर आधुनिक विज्ञान भी सिर पकड़ ले.
हीरा खोजने के लिए लेते है शक्तियों का सहारा
खदानों में पसीना बहा रहे मजदूरों का मानना है कि हीरा ‘चंचल’ होता है और वह सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं, बल्कि ‘शक्तियों’ को खुश करने से मिलता है. हीरापुर और सरकोहा जैसे क्षेत्रों में बुधवार और रविवार को होने वाले टोटके रूह कंपा देने वाले होते हैं. स्थानीय मजदूरों के अनुसार, यहाँ श्मशान के मटके से खदान में पानी छिड़कने की परंपरा है ताकि अतृप्त शक्तियां गुप्त धन का रास्ता खोल दें.
बेहद अजीबोगरीब मान्यता
इतना ही नहीं, एक बेहद अजीबोगरीब मान्यता के तहत खदान की ‘चाल’ पर ब्रह्ममुहूर्त में शारीरिक संबंध बनाने को शुभ माना जाता है, ताकि भूमि की ‘खुलने की शक्ति’ जागृत हो सके. अंधविश्वास की पराकाष्ठा यहीं खत्म नहीं होती. मजदूर बताते हैं कि यहाँ महिलाओं को खदानों में पैर पकड़कर घसीटने का भी टोटका किया जाता है, ताकि उनके मुंह से निकला ‘आशीर्वाद’ हीरे की प्राप्ति कराए.
हीरा पारखी अनुपम शर्मा ने कहा कि….
हीरा पारखी अनुपम शर्मा भी स्वीकार करते हैं कि मेहनत के बाद जब परिणाम नहीं मिलता, तो मजदूर आध्यात्म और टोटकों की शरण लेते हैं. विज्ञान भले ही इसे भूगर्भीय हलचल कहे, लेकिन पन्ना के मजदूरों के लिए हीरा किस्मत, कर्म और इन रहस्मयी टोटकों का एक अनूठा संगम है.
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