MP News: मूक बाधिर दंपति में पत्नी के फैसले ने बढ़ाया सस्पेंस, तलाक के मामले में कोर्ट जून में दोबारा करेगा सुनवाई
सांकेतिक तस्वीर.
MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर कुटुंब न्यायालय की लोक अदालत में एक ‘खामोश’ सुनवाई हुई. दरअसल मामला एक मूक-बाधिर दंपति के तलाक से जुड़ा है. चूंकि पति, पत्नी दोनों मूक बाधिर हैं. इसलिए सुनवाई के दौरान किसी ने कुछ नहीं बोला. सिर्फ साइन लैंग्वेज के जरिए बात होती रही. इस दौरान साइन लैंग्वेज एक्स्पर्ट्स ने कोर्ट की तरफ से दंपती को समझाने की कोशिश की. इसके बाद पति तो मान गया. लेकिन पत्नी ने असहमति जाहिर कर दी. अब मामले में दोबारा कोर्ट में सुनवाई का फैसला लिया गया है.
लोक अदालत में 456 मामले रखे गए
कुटुंब न्यायालय के नाजिर राकेश गुप्ता ने बताया कि कुटुंब न्यायालय में लोक अदालत के लिए 5 पीठों का गठन किया गया था. अब तक लोक अदालत में 456 मामले आ चुके हैं. जिनमें से 99 मामलों में समझौता हुआ. जबकि केवल 7 पति-पत्नी ही साथ रहने के लिए कोर्ट से रवाना हो गए.
लोक अदालत के कारण बच गया परिवार
विवाद के बाद लोक अदालत में आए कई दंपति समझौते के बाद साथ रहने के लिए राजी हो गए, जिनसे उनका परिवार बच गया. मालवा मिल निवासी एक मुस्लिम दंपति विवाद के बाद लोक अदालत में आया था दोनों के दो बेटियां भी थीं. लेकिन ससुराल और मायके पक्ष में विवाद होन के बाद दोनों में अलग होने की नौबत आ गई. जिसके बाद लोक अदालत में दंपती की काउंसलिंग हुई. इसके बाद पति ने पत्नी और दोनों बच्चों का ख्याल रखने का आश्वासन दिया और फिर कोर्ट की मध्यस्थता के बाद दोनों खुशी-खुशी घर में साथ रहने के लिए चले गए.
इसी तरह आजाद नगर निवासी एक दंपती के 20 साल पुराने शादी के रिश्ते को लोक अदालत ने बचा लिया. 48 साल के पति और 42 साल की पत्नी में विवाद के बाद पत्नी ने पहले तो भरण-पोषण का केस दायर किया. इसके बाद तलाक का केस कोर्ट में किया, लेकिन लोक अदालत ने दोनों को समझाबुझाकर साथ रहने के लिए राजी कर लिया. जिससे उनकी उजड़ती दुनिया बस गई.
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