Vistaar Education Conclave: संस्कार, शिक्षा और AI पर फोकस, श्री वैष्णो विद्यापीठ विश्वविद्यालय के डायरेक्टर ने बताया भविष्य का विजन
श्री वैष्णो विद्यापीठ के डायरेक्टर जितेश मालवीय
Vistaar Education Conclave: श्री वैष्णो विद्यापीठ विश्वविद्यालय के डायरेक्टर प्लेसमेंट जितेश मालवीय ने बताया कि श्री वैष्णों विद्यापीठ की शुरुआत यदि हम देखें, तो इसके पीछे हमारे चांसलर परशुरथम दासजी पशारी और प्रो-चांसलर कमल बुराड़िया जी का बड़ा योगदान रहा है. ये दोनों कपड़ा व्यापारी संघ के सदस्य रहे हैं. इस संस्था का 142 वर्षों का इतिहास है. इसकी शुरुआत 1884 में श्री वैष्णो सहायक कपड़ा व्यापारी समिति के तहत हुई थी.
ट्रस्ट की स्थापना और शिक्षा का विस्तार
इस संस्था का एक ही उद्देश्य था कि समाज और समाज के बच्चों के हित में क्या योगदान दिया जा सकता है. इसी सोच के साथ निरंतर प्रयास किए गए. वर्ष 1940 में वैष्णो सहायक ट्रस्ट की स्थापना हुई. इसके बाद ट्रस्ट ने कई स्कूल, कन्या विद्यालय, बाल विनय मंदिर और अन्य अकादमियों की शुरुआत की.
साल 1995 में “वैष्णो इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी” की स्थापना की गई. फिर 2016 से यह संस्था श्री वैष्णो विद्यापीठ विश्वविद्यालय के रूप में इंदौर में संचालित हो रही है.
शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर
आज विश्वविद्यालय का विजन केवल शिक्षा देना नहीं है, बल्कि शिक्षा के साथ सिद्धांत और संस्कार देना भी है. यहां छात्र केवल पढ़ाई के लिए नहीं आते, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार और जीवन के सिद्धांत भी सिखाए जाते हैं, ताकि वे समाज में आगे बढ़ सकें. ट्रस्ट का विचार है कि सभी के सहयोग और समाज की उन्नति के लिए जो भी आर्थिक मदद संभव हो, वह की जाए.
देश-विदेश में पहुंचे एलुमनाई
विश्वविद्यालय ने 1995 में इंजीनियरिंग की शुरुआत की थी. आज यहां के एलुमनाई Infosys, Microsoft और JP Morgan जैसी बड़ी कंपनियों में डायरेक्टर और वाइस प्रेसिडेंट स्तर तक पहुंचे हैं. हाल ही में आयोजित एलुमनाई मीट में 2001 बैच के कई पूर्व छात्र शामिल हुए, जो बड़ी कंपनियों में ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं.
उद्यमिता और समाज सेवा पर फोकस
विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल लोगों को शिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें समृद्ध बनाना भी है. शिक्षा के साथ उद्यमिता यानी Entrepreneurship को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. ट्रस्ट का मकसद व्यवसाय करना या पैसा कमाना नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करना और उन्हें संस्कार देना है.
इंदौर में ट्रस्ट द्वारा संचालित एक बड़ा डायलिसिस सेंटर भी है, जहां 21 मशीनें एक साथ चलती हैं. यहां मरीजों से केवल 400 रुपये लिए जाते हैं, जबकि बाकी खर्च ट्रस्ट वहन करता है.
नई शिक्षा नीति के तहत IKS लागू
आगे की योजनाओं पर बात करते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बताया कि नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत सभी कोर्सों में Indian Knowledge System (IKS) को लागू किया जा रहा है. इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और अन्य सभी विषयों में छात्रों को भारतीय संस्कृति, सभ्यता और वेदों की जानकारी दी जाएगी.
सभी कोर्स में AI अनिवार्य
इसके अलावा Artificial Intelligence (AI) को भी सभी कोर्सों में अनिवार्य कर दिया गया है. उनका मानना है कि AI केवल नोट्स बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि रिसर्च, ट्रेनिंग और प्लेसमेंट में भी बहुत उपयोगी साबित हो सकता है.
जब उनसे कॉलेज जीवन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. इसलिए उनका एक ही उद्देश्य था कि नियमित रूप से क्लास अटेंड करें और पढ़ाई पर ध्यान दें. उन्होंने कहा कि जब छात्र खुद अपनी पढ़ाई का खर्च समझते हैं, तो वे शिक्षा के प्रति अधिक गंभीर रहते हैं.
करियर से न भटकने की सीख
लव लाइफ और शादी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह जीवन का एक हिस्सा है और हर व्यक्ति को जीवन के सभी चरणों को अच्छे से जीना चाहिए. लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि व्यक्ति अपने करियर और उद्देश्य से कभी न भटके.
जागरूकता बढ़ाने पर दिया जोर
मध्य प्रदेश की शिक्षा को देश और दुनिया में पहचान दिलाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह संभव है. उनके अनुसार सबसे बड़ी जरूरत Awareness यानी जागरूकता की है. आज कई छात्र Peer Pressure में आकर कॉलेज और ब्रांच चुन लेते हैं, लेकिन उन्हें यह पता नहीं होता कि उन्हें आगे क्या करना है.
NASSCOM रिपोर्ट का किया जिक्र
उन्होंने NASSCOM की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि 2024 में भारत की केवल 51.25 प्रतिशत आबादी ही Employable थी, जो 2025 में बढ़कर 54.81 प्रतिशत हुई है. उनका मानना है कि अगर सही जागरूकता और मार्गदर्शन दिया जाए, तो यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है.