MP News: राज्यसभा चुनावों के लिए 18 जून को होगा मतदान, कांग्रेस को सता रहा है क्रॉस वोटिंग का भय

मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है. भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है. 18 जून को मतदान और मतगणना एक साथ होगी.
RAJYA SABHA ELECTION SCHEDULE

फाइल फोटो

मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है. भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है. 1 जून 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 18 जून को मतदान और मतगणना एक साथ होगी. भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है, लेकिन सबसे ज्यादा नजर कांग्रेस की उस एक सीट पर है, जिसे बचाए रखना पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस बार चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद कांग्रेस में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त सामने आ गई है.

कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार

कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, अरुण यादव और सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं. वहीं भाजपा अपनी दोनों सीटों को लेकर काफी हद तक आश्वस्त नजर आ रही है. भाजपा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल पूरा हो रहा है. पार्टी जॉर्ज कुरियन को दोबारा राज्यसभा भेज सकती है, जबकि आदिवासी चेहरे के तौर पर किसी नए नाम पर भी विचार हो सकता है.

वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता के मुताबिक प्रदेश में खाली हो रही तीन सीटों में दो भाजपा और एक कांग्रेस के खाते की है. भाजपा अपने संख्याबल के आधार पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन कांग्रेस के सामने अपनी एकमात्र सीट बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है.

आदिवासी समीकरण साधने की कोशिश

भाजपा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी फिलहाल पार्टी के प्रदेश महामंत्री भी हैं. वे संघ से जुड़े मजबूत आदिवासी चेहरे माने जाते हैं. मध्य प्रदेश में करीब 22 प्रतिशत आदिवासी आबादी को देखते हुए भाजपा इस सीट पर आदिवासी समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है. हालांकि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान और दिल्ली नेतृत्व को करना है.

इधर कांग्रेस का कहना है कि इस बार जमीन से जुड़े नेता को राज्यसभा भेजा जाएगा. पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार लगातार बैठकें कर रहे हैं और जनता की आवाज बुलंद करने वाले नेता को मौका दिया जाएगा. वहीं भाजपा का कहना है कि उनके यहां टिकट का फैसला संगठन और नेतृत्व करता है, कांग्रेस की तरह खींचतान नहीं होती.

कांग्रेस अपनी एकमात्र सीट बचा पाती है या नहीं

अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस अपनी एकमात्र सीट बचा पाती है या भाजपा कोई बड़ा दांव खेलकर उसे भी अपने खाते में जोड़ने की कोशिश करती है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय जैसे बड़े नामों की भी हो रही है, जिन्हें पार्टी राज्यसभा के जरिए नई जिम्मेदारी दे सकती है. ऐसे में मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव इस बार केवल संख्या का नहीं, बल्कि सियासी प्रतिष्ठा का मुकाबला बनता नजर आ रहा है.

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